गोवा में फिर सुगबुगाहट


गोवा सरकार भी एक ऐसी सरकार है जिसे अमित शाह द्वारा बनाई हुई माना जाता है।
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गोवा सरकार भी एक ऐसी सरकार है जिसे अमित शाह द्वारा बनाई हुई माना जाता है। क्योकि ऐसा प्रचलित है कि जहां बहुमत होता है वहां तो कोई भी सरकार बना ले पर जहां अल्पमत हो वहां भी सरकार बना ले उसे अमित शाह कहते है। चूंकि गोवा में भी भाजपा अल्पमत में थी फिर भी वहां सरकार बना ली तो इसे लोग अमित शाह की करामात कहते है। हालांकि इस सरकार में अमित शाह के बनिस्पत वहां के मुख्यमंत्री का रोल ही था जो उस समय केंद्र में रक्षामंत्री थे तथा गोआ में सरकार बनकर चल सके इसके लिए उन्हें केंद्र से राज्य में भेजा गया था। अभी वो क्रिटिकल डिजीज से पीड़ित है तथा काफी कमजोर हो गए है।

कांग्रेस कई बार कह चुकी है कि राज्य के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर गंभीर रूप से बीमार हैं और उन्हें हटाकर किसी और को मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए या फिर कांग्रेस को मौका दिया जाए। इसी कड़ी में लोकसभा चुनाव के बीच गोवा कांग्रेस ने शनिवार को राज्य में सरकार बनाने का दावा पेश किया। राज्यपाल मृदुला सिन्हा को लिखे पत्र में पार्टी ने मांग की है कि वे भाजपा की अल्पमत की सरकार को बर्खास्त करें और राज्य के सबसे बड़े दल कांग्रेस को सरकार बनाने का मौका दिया जाए। कांग्रेस ने पत्र में यह भी लिखा कि गोवा में राष्ट्रपति शासन लगाने की कोशिश की जाती है तो यह अवैध है और इस फैसले को चुनौती दी जाएगी। इस पर भाजपा ने भी आज अपने विधायकों की बैठक बुलाई है।

गोवा में विधानसभा की कुल 40 सीटें हैं। बीजेपी विधायक फ्रांसिस डिसूजा के निधन, कांग्रेस सुभाष शिरोडकर और दयानंद सोप्ते के इस्तीफा देने के चलते राज्य विधानसभा में अब 37 एमएलए ही बचे हैं। सोप्ते और शिरोडकर भाजपा में शामिल हो चुके हैं। इसके चलते कांग्रेस के पास अब 16 की बजाय 14 विधायक ही बचे हैं, जबकि बीजेपी के पास 13 विधायक हैं। लेकिन बीजेपी को गोवा फॉरवर्ड पार्टी के तीन, महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी के तीन और एनसीपी के एक विधायक के अलावा एक निर्दलीय का भी समर्थन हासिल है। इस तरह बीजेपी के पास कुल 21 विधायकों का समर्थन है।

कांग्रेस को लग रहा है कि जिन पार्टीयो ने मनोहर पर्रिकर को देख कर समर्थन दिया था वो उनकी बीमारी की स्थिति में दूसरे मुख्यमंत्री को मंजूर नही करेंगे। इसके अलावा इस समय मुख्यमंत्री के साथ साथ उपमुख्यमंत्री भी बीमार चल रहे है तो राज्य में यह सुगबुगाहट है कि पार्टी नया मुख्यमंत्री चुनेगी या किसी को एक ओर उपमुख्यमंत्री का पद इनायत करेगी। इसी सुगबुगाहट के बीच कांग्रेस इसका फायदा उठाना चाहती है, हालांकि यह राज्यपाल पर निर्भर है कि वो क्या हल निकाले पर कांग्रेस के पक्ष में जल्दी परिणाम नही जाने देंगे ऐसा निश्चित है।

वैसे हमारे देश की जम्हूरियत कुछ है ही ऐसी। यहां जिसके पास माथे ज्यादा न भी हो तो वो जुगाड़ करके अगर इकट्ठा करले तो सत्ता उसी की होती है।

अल्लामा इकबाल का एक शेर इस बात पर याद आ गया,
जम्हूरियत इक तर्ज़-ए-हुकूमत है कि जिस में
बंदों को गिना करते हैं तौला नहीं करते।।

सर्व आश्रयदात्री भारत माता की जय