तय करे सामाजिक जिम्मेदारी


जहाँ स्त्री शक्ति का सम्मान होता है, प्रभु वहां निवास करते है। और हमारे देश की सनातन परंपरा है कि हमारे देश के लोग महिलाओं को सम्मान देते भी है।
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अभी आठ दिन पहले ही महिला दिवस के दिन मैने लिखा था कि

यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमन्ते तत्र देवता।

अर्थात जहाँ स्त्री शक्ति का सम्मान होता है, प्रभु वहां निवास करते है। और हमारे देश की सनातन परंपरा है कि हमारे देश के लोग महिलाओं को सम्मान देते भी है। हमारे यहां छोटी बालिकाओं को देवी की संज्ञा दी जाती है। नवरात्रि में उनका पूजन करके आशीर्वाद लिया जाता है। नवरात्रि के अलावा भी जब कोई शुभकार्य हो तो वो कन्याओं द्वारा करवाया जाता है।

लेकिन ऐसे संस्कृति सम्पन्न देश मे जब बालिकाओं पर अत्याचार होता है तब मन का व्यथित होना लाजमी है। स्त्री भ्रूण हत्या यहाँ अभी नई बात नही है लेकिन यह दूषण सरकारी कड़ाई के बाद कम हो रहा है परन्तु जो अत्याचार अभी बहुत ज्यादा हो रहा है वो बच्चियों पर बलात्कार का है। हमारे सूरत में पिछले पांच दिन में तीन बालिकाओं के साथ दुष्कर्म के मामले दर्ज हुए है। नराधमों ने बालिकाओं की उम्र को भी दया के योग्य न समझा, ओर इस तरह के करुण कुकृत्य को अंजाम दे दिया।

कल रेलवे पुलिस हद में एक आठ वर्षीय बालिका गंभीर हालत में मिली। जिस पर पाशवी बलात्कार करके नराधम ने रेलवे ट्रेक के पास डाल दिया। स्थानीय लोगो ने पुलिस को सूचना दी तो रेलवे पुलिस ने आगे की कार्यवाही हाथ मे लेकर बालिका को सम्मिमेर अस्पताल में प्राथमिक उपचार के लिए दाखिल किया गया।

चूंकि मैं वहां पर प्रत्यक्षदर्शी था इसलिए मुझे इस घटना की भयावहता का अहसास है। इस बच्ची पर उस समय तथा अब बाद में क्या गुजरेगी यह सोचकर ही मन सिहर उठता है। जिस स्थिति में वो बालिका है उसे देखकर कठोर से कठोर व्यक्ति का हृदय भी व्यथित हो जाये तो उसके मातापिता पर क्या गुजर रही होगी?

यह विषय केवल समाचारपूर्ति ही नही है। यह एक जागरूकता का विषय है। सामाजिक संस्थाओं तथा शहर के जागरूक नागरिकों की यह जिम्मेदारी है कि इस विषय पर संज्ञान लेते हुए सभी अभिभावकों को इस विषय के प्रति जाग्रत करना चाहिए। हम सभी का यह कर्तव्य है कि बालिकाओं ओर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रति हम योग्य कदम उठाए।

हाल में शहर में स्पर्श नाम की संस्था इस विषय पर कार्य कर रही है। इस संस्था में किशोरियों द्वारा जोकि मात्र 16 से 19 वर्ष की उम्र की ही है, स्लम एरिया में जाकर जाग्रति अभियान चलाया जाता है जिसमे बच्चो बच्चियों तथा उनकी माताओं को यौन शोषण के बारे में विस्तार पूर्वक बताकर इससे बचने के उपाय बताए जाते है। वो छोटी छोटी घटनाएं जो बच्चियों के साथ होती है लेकिन कमउम्र के कारण वो समझ नही पाती है। उनकी माताओं को भी यह बालिकाएं समझाती है की आपस के लोगो द्वारा होने वाले शोषण से कैसे बचा जाए।

लेकिन एक दो संस्थाओं के द्वारा ही किया गया प्रयास अपर्याप्त है। जितनी भी सामाजिक संस्थाए तथा जागरूक नागरिक है उन्हें इस विषय मे आगे आना चाहिए। खासकर स्लम एरिया में बच्चियों को इस विषय मे समझाना चाहिए कि वो किसी नराधम के झांसे में न आये और अगर कभी फंस भी जाये तो किसप्रकार अपनी रक्षा वो कर सके।

हमारे देश की संस्कृति के अनुरूप हम चले तथा जो नही चलता उसे चलने के लिए आग्रह करे। संसार की कोई भी कन्या देवी स्वरूप है यह भावना हम सभी देशवासियों में होनी चाहिए। खाली देश को ही भारत माता कहना पर्याप्त नही है, सभी माताओं का सम्मान भी आवश्यक है।

सर्व आश्रयदात्री भारत माता की जय।