जीएसटी में भी होने लगे चुनाव लक्षी परिवर्तन


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चुनाव जैसे जैसे नजदीक आ रहे है वैसे वैसे केंद्र सरकार प्रजा को लुभाने के लिए अपने निर्णय ले रही है। इस सप्ताह सवर्ण मतदाताओं को लुभाने के लिए सवर्ण आरक्षण की घोषणा करके संसद के दोनों सदनों में उसे पास करवा लिया।

इसी क्रम में व्यापारियों को खुश करने के लिए जीएसटी काउंसिल ने छोटे कारोबारियों को राहत दी है। गुरुवार को काउंसिल ने जीएसटी रजिस्ट्रेशन से छूट के लिए सालाना टर्नओवर की लिमिट 20 लाख रुपए से बढ़ाकर 40 लाख रुपए करने का फैसला लिया। उत्तर-पूर्वी राज्यों के कारोबारियों के लिए यह लिमिट 10 लाख रुपए से बढ़ाकर 20 लाख रुपए कर दी गई है।

कंपोजीशन स्कीम के लिए सालाना टर्नओवर की लिमिट भी 1 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 1.5 करोड़ कर दी है। कंपोजीशन स्कीम के तहत आने वाले कारोबारियों को टैक्स हर तिमाही में जमा करवाना पड़ेगा लेकिन रिटर्न साल में एक बार भर सकेंगे। 50 लाख रुपए तक टर्नओवर वाले सर्विस प्रोवाइडर को कंपोजीशन स्कीम का फायदा मिलेगा। उन्हें 6% टैक्स देना होगा। यह छूट 1 अप्रेल से लागू हो जाएगी।

हाल के आंकड़ो के अनुसार देश में 1.17 करोड़ बिजनेस जीएसटी के तहत रजिस्टर्ड हैं। इनमें से 18 लाख कंपोजीशन स्कीम का फायदा ले रहे हैं।

काफी दिनों से यह सीमा बढ़ाने की मांग चल रही है लेकिन सरकार तथा काउंसिल ने इस पर ध्यान नही दिया। अब जब चुनाव सामने है तब सभी मतदाताओं को साधने के कार्यक्रम के तहत व्यापारी मतदाता जो कि भाजपा के परम्परागत वोटर है उनके लिए खुशखबरी काउंसिल ने दी है।

काफी दिन पहले मेने लिखा था कि जैसे जैसे चुनाव नजदीक आएगा वैसे वैसे काफी बदलाव जीएसटी में आएगा। कल के बदलाव अभी पूर्ण संतुष्टिजनक नही है। अगले महीने आरसीएम तथा आईटीसी04 पर भी निर्णय आएगा। जो अनावश्यक पैनल्टी लगाई गई है वो भी रद्द कर दी जाएगी।

लेकिन इन सबके बीच एक बात मन की बात पूछता हूं कि हमारे देश मे सिर्फ चुनावलक्षी निर्णय ही क्यो होते है? पहले कोई भी नियम कानून को मुश्किल बनाकर चुनाव के समय ही सरल क्यो किया जाता है?

सर्व आश्रयदात्री भारत माता की अनन्त जयजयकार।