लो आया ऋतुराज बसन्त


विश्व मे भारतीय उपमहाद्वीप ही ऐसी जगह है जहां वर्ष में छह ऋतु होते है। इन छहों मौषम में लोगो का सर्वाधिक पसंदीदा मौषम वर्षा और बसन्त है।
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विश्व मे भारतीय उपमहाद्वीप ही ऐसी जगह है जहां वर्ष में छह ऋतु होते है। इन छहों मौषम में लोगो का सर्वाधिक पसंदीदा मौषम वर्षा और बसन्त है। दोनो ऋतुओं में बसन्त सर्वाधिक पसन्द की जाती है। शरद ऋतु के बाद पतझड़ के बीत जाने पर बहार का आगमन होता है। खेतो में सरसों फूलती है और भँवरे गुंजार करते है। तो सांसारिक प्राणियों के मन मयूर भी नाच उठते है। शाखों पर नई कोंपले एक नई ऊर्जा का संचार करती है। नव सर्जन की प्रेरणा भी देती है। इसी दिन हमारे देश मे सरस्वती पूजा होती है। विद्या तथा बुद्धि की अधिष्ठात्री देवी माँ शारदा का इस दिन पूजन वैसे पूर्वी भारत मे ज्यादा प्रचलित है परन्तु शेष भारत मे भी इस दिन विद्या के आकांक्षी माँ सरस्वती का पूजन करते है।

बसन्त पंचमी का ऐतिहासिक महत्व भी है। बसंत पंचमी का दिन हमें पृथ्वीराज चौहान की भी याद दिलाता है। उन्होंने विदेशी हमलावर मोहम्मद ग़ोरी को 16 बार पराजित किया और उदारता दिखाते हुए हर बार जीवित छोड़ दिया, पर जब सत्रहवीं बार वे पराजित हुए, तो मोहम्मद ग़ोरी ने उन्हें नहीं छोड़ा। वह उन्हें अपने साथ अफगानिस्तान ले गया और उनकी आंखें फोड़ दीं। मोहम्मद ग़ोरी ने मृत्युदंड देने से पूर्व उनके शब्दभेदी बाण का कमाल देखना चाहा। पृथ्वीराज के साथी कवि चंदबरदाई के परामर्श पर ग़ोरी ने ऊंचे स्थान पर बैठकर तवे पर चोट मारकर संकेत किया। तभी चंदबरदाई ने पृथ्वीराज को संदेश दिया कि सुल्तान कहाँ बैठा है, इशारा पाते ही चौहान में सुल्तान को तीर से बिंध दिया। वो दिन बसन्त पंचमी का ही था।

15 वर्ष के वीर हकीकत राय और उनके साथ ही सती हो जाने वाली उनकी पत्नी लक्ष्मी देवी के बलिदान की गाथा भी जुड़ी है बसंत पंचमी के साथ। बसन्त पंचमी के दिन वीर हकीकत राय ने धर्म हेतु अपना बलिदान दिया था। आज भी हकीकत राय के बलिदान को याद करके बसन्त पंचमी के दिन मेला भरता है। कलाकारों का भी यह सबसे पसंदीदा दिन ओर ऋतु है। कला की अधिष्ठात्री देवी भी माँ सरस्वती ही मानी जाती है। कलाकार इस दिन माँ की पूजा करते है। हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के दो प्रसिद्ध राग बसन्त तथा बहार इसी दिन के लिए सृजित हुए थे। इस दिन शास्त्रीय कलाकार उनका गायन वादन जरूर करते है, माँ शारदा को प्रसन्न करने हेतु।

यह हमारे देश की विशेषता है कि हर दिन, हर ऋतु पावन तथा धर्ममय होती है उसी प्रकार बसन्त पंचमी का भी अपना महत्व है ही। राजस्थान में आज के ही दिन होली का डांडा रोपण होता है तथा फाग महोत्सव का आगाज आज ही के दिन होता है। आज से फगुआ गाने की ऋतु भी प्रारम्भ हो गई है। अब होली तक बासन्ती स्वर गूंजते रहेंगे।

हम सभी के मन पर ऋतुराज बसन्त हर हमेश छाया रहे तथा कभी पतझड़ न आये यही प्रार्थना है।

सर्व आश्रयदात्री भारत माता की जय