बजट विशेष : 2019 (व्यापार जगत)


आयकर की छूट सीमा बढा कर 5 लाख कर दी गयी है। लेकिन यदि कुल आय 5 लाख से बढ़ जाती है तो इस बढ़ी हुई छूट का लाभ नही मिलेगा।

1. आयकर की छूट सीमा बढा कर 5 लाख कर दी गयी है। लेकिन यदि कुल आय 5 लाख से बढ़ जाती है तो इस बढ़ी हुई छूट का लाभ नही मिलेगा। क्योकि ये केलकुलेशन इस प्रकार हैं।;-2/50 तक निल व 2/50 से 5/00 लाख तक 5% व 5/00 से 10/00 लाख तक 20% ओर 10/00 लाख से अधिक 30% ही टैक्स लगेगा।

2.कुल आय से अभिप्राय Lic, NSC, PPF, Housing loan की मूल राशि के भुगतान की 1.50 लाख की कटौती, Medical premium की 25000/- से 50000/- तक की कटौती, National pension scheme की 50000/- की कटौती, बैंक ब्याज की 10000/- की कटौती ( वरिष्ठ नागरिकों के लिए 50000/-), Education loan के interest की कटौती (Unlimited amount) Housing loan ब्याज की 2 लाख की कटौती इत्यादि के बाद वाली आय से है।

3. Salary income में से Standarad deduction की अधिकतम कटौती की सीमा को 40000/- से बढ़ा कर 50000/- कर दिया है।

4. अभी तक बिल्डर्स को प्रोजेक्ट complete हो जाने के एक वर्ष बाद unsold flat/ Shops/offices की deemed rent income पर income tax देना होता था लेकिन अब उन्हें दो साल तक ऐसी deemed income पर टैक्स नही देना होगा।

5. यदि आपके पास दो मकान है तो एक मकान को खुद के use के लिए बता सकते थे और दूसरे मकान की Rent income पर tax देना होता था चाहे वो मकान खाली पड़ा हो। लेकिन अब दो मकान तक इस तरह की काल्पनिक आय पर कोई tax देने की जरूरत नही है।

6. अभी तक Bank तथा post office द्वारा 10000/- से अधिक के ब्याज भुगतान के समय tds काटा जाता था अब वो limit बढ़ा कर 40000/- कर दी गयी है।

7. अभी तक 180000/- से अधिक के RENT के भुगतान पर TDS काटा जाता था अब ये LIMIT बढ़ा कर 240000/- कर दी गयी है।

8.अब आयकर रिटर्न भरने के बाद जो रिफंड की प्रकिया थीं उसे 24 घंटे मैं रिफंड मिलने व सीधे बैंक मैं जमा करने से करदाता को राहत मिल पायगी।

9.बजट में सरकार ने एक करप्सन रोकने के लिए अच्छा कदम उठाया हैं कि जो भी केसेज होंगे उसका न तो करदाता व नहीं जांच अधिकारी को आपस मैं पता होगा।न ही व संपर्क कर पायगे।

10.जीएसटी मैं आई टी सी 4 व आर सी एम के लिए जो लगातार हटाने की मांग की जा रही थी उस पर सरकार ने कोई राहत नही दी हैं।

नोट: यह सभी प्रावधान प्रस्तावित है। यह संभव है कि full budget के समय नई सरकार द्वारा और भी कुछ प्रावधान बदले जाए।