भला हो जिसमें देश का, वो काम सब किये चलो


चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बुधवार देर रात जैश ए मोहम्मद सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने से फिर एक बार बचा लिया।
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चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बुधवार देर रात जैश ए मोहम्मद सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने से फिर एक बार बचा लिया। 10 साल में यह चौथी बार है जब चीन ने मसूद के मुद्दे पर अपने वीटो पावर का इस्तेमाल किया। अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने के लिए 27 फरवरी को फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका एक नया प्रस्ताव लाए थे। इस पर आपत्ति की समय सीमा (बुधवार रात 12:30 बजे) खत्म होने से ठीक एक घंटे पहले चीन ने इस पर अड़ंगा लगा दिया।

हालांकि प्रस्ताव अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन का था लेकिन इससे भारत सीधा सीधा प्रभावित हो रहा था, क्योकि मसूद ने बहुत ज्यादा आतंक भारत मे फैला रखा है। हाल ही में हुए पुलवामा हमले का भी वही जिम्मेदार है। लेकिन यह प्रस्ताव चीन के वीटो पावर के कारण टेक्नीकल होल्ड पर रख दिया गया जो अगले छह महीने तक रहेगा। जैसे ही कल मध्य रात्रि यह हुआ भारत मे राजनीति गरमा गई। दोनो प्रमुख राजनैतिक दल एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाने में मशगूल हो गए।

राहुल गांधी ने ट्वीट किया कि मोदी कमजोर हैं और वह चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से डरते हैं। जब चीन ने भारत का विरोध किया तो मोदी के मुंह से एक शब्द भी नहीं निकला। राहुल ने ट्वीट में मोदी की चीन को लेकर कूटनीति भी समझाई। उन्होंने कहा कि मोदी ने शी को गुजरात में घुमाया, दिल्ली में उन्हें गले लगाया और चीन में उनके आगे झुक गए।

इसका जबाब देते हुए केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि राहुलजी, भारत को जब पीड़ा होती है तो आपको खुशी क्यों होती है? आपकी और हमारी राजनीति में अंतर होगा, विरोध होगा, लेकिन क्या एक आतंकी के बचाए जाने पर भी आप ऐसा बर्ताव कर रहे हैं? आजकल आपको पाक मीडिया में खुद को देखकर काफी खुशी हो रही होगी। जब राग दरबारी में एक सुर लगता है तो सभी वही सुर गाते हैं।

उन्होंने जवाहरलाल नेहरू पर चीन को सुरक्षा परिषद में सीट देने की बात कहते हुए कहा कि इन्वेंशन ऑफ इंडिया में शशि थरूर ने लिखा कि तत्कालीन भारतीय विदेश विभाग के अधिकारी जिन्होंने फाइल देखी, वे कसम खाते हैं कि नेहरू ने खुद यूएन की सीट चीन को दी। यह सत्य भी है। पंडित नेहरू के कारण भारत ने उस समय के मित्र सोवियत रूस के साथ मिलकर चीन को सदस्य बनाने के लिए 25 साल तक बराबर सहयोग दिया था। तब जाकर 1971 में उसे सदस्यता मिल पाई थी।

लेकिन अहसानफरामोश चीन ने सदैव भारत के आगे रोड़ा ही लगाया है। चीन के वीटो पावर के चलते ही भारत को परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) की सदस्यता नहीं मिल पा रही है। सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता पर भी चीन ने ही अड़ंगा लगाया था।
यह लगातार चौथी बार है जब चीन ने मसूद अजहर के मामले में वीटो का उपयोग किया है, इससे साफ़ जाहिर होता है कि चीन पाकिस्तान का खुला समर्थन कर रहा है और करेगा। यदि चीन को भारत के बाज़ार से बेदखल कर दिया जाए तो शायद चीन को समझ आए जाये। कन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने सरकार से मांग की है कि चीनी वस्तुओं के आयात पर 300 से 500 प्रतिशत कस्टम ड्यूटी लगा दी जाए।

इसके अलावा कैट ने यह भी घोषणा की है कि आगामी 19 मार्च को देश भर में हजारों स्थानों पर व्यापारी चीनी सामान की होली जलाएंगे। चीन के लिए भारत एक बड़ा बाजार है और यदि इस बाज़ार से चीन को बेदखल कर दिया जाए तो इससे चीन की अर्थव्यवस्था को तगड़ा झटका झेलना होगा।

हर काम सरकार ही करे यह जरूरी नही है। हो सकता है वैश्विक दबाब में कई निर्णय न लिए जा सके पर आखिरी उपभोक्ता तो हम ही है। हम बाध्य थोड़े ही है चीनी वस्तुएं खरीदने के लिए? इसलिए हमें राष्ट्रहित को सर्वोपरि समझते हुए चाहे कितना भी सस्ता हो पर चीनी सामान का बहिष्कार करना चाहिए। जरूरी नही की हर व्यक्ति बॉर्डर पर जाकर ही लड़ाई लड़े, यह लड़ाई हम घर से भी लड़कर देश का हित कर सकते है।

सर्व आश्रयदात्री भारत माता की जय