अन्नदाता सुखी भवः


ऐसा माना जा रहा है कि तीन राज्यों की सरकार सिर्फ किसान कर्जमाफी के मुद्दे पर बदल गई है। 
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भारत मे कुछ भी कार्य चुनाव के मद्देनजर ही किया जाता है। यदि कोई सरकार चुनाव को देख कर निर्णय नही करती तो उलटफेर का शिकार भी बन जाती है।
आजकल इस संदर्भ में देश के किसान सबसे अधिक पूछ परख में है। ऐसा माना जा रहा है कि तीन राज्यों की सरकार सिर्फ किसान कर्जमाफी के मुद्दे पर बदल गई है।
कल केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी इस बात के संकेत दिए कि किसानों के लिए जल्द बड़ा ऐलान किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों के हितों के लिए प्रतिबद्ध है।
अभी किसानों 3 लाख से 7 लाख तक 7% की दर पर ऋण उपलब्ध करवाया जाता है और जो किसान समय पर भुगतान करते है तो उन्हें 3% इंसेंटिव मिलता है। लगभग केंद्र सरकार बाकी के 4% को भी माफ करने के विचार में है।
किसानों को ब्याज में छूट देने पर केंद्र सरकार हर साल 15,000 करोड़ रुपए खर्च करती है। अगर पूरी तरह ब्याज माफ किया जाता है तो यह राशि 30,000 करोड़ रुपए हो जाएगी।
इसके अलावा भी फसल बीमा का प्रीमियम जो किसानों द्वारा देय होता है उसमे भी राहत करने का विचार भी किया जा रहा है।
स्वामी सहजानन्द सरस्वती ने कहा था कि रोटी भगवान है और रोटी पैदा करने वाला किसान भगवान से भी बढ़कर है। इस विराट देश मे अन्नदाता कहे जाने वाले किसानों के लिए सिर्फ चुनाव पूर्ति ही नही बल्कि उनके लिए स्थायी योजना बननी चाहिए।
किसी भी युग मे कृषि का महत्व रहा है तथा आगे भी रहेगा। इसका प्रतिस्थापन्न कुछ भी नही है। इसके लिए इस क्षेत्र का प्रभावी उन्नयन आवश्यक है।
देखते है कब भारत मे ऐसी योजनाये तथा उनकी क्रियान्विति होगी जो सिर्फ चुनावलक्षी न होकर सिर्फ देश तथा देश की जनता के हित के लिए होगी ।
अन्नदाता किसान के सुखद भविष्य की कामना के साथ
सर्व आश्रयदात्री भारत माता की जय