शेयर बाजार में सफलता के नये सोपान तय कर रहा सूरत का युवा कारोबारी रोहन मेहता


टर्टल वेल्थ के बैनर तले वेल्थ मैनेजमेंट और ट्रेडिंग के गुर सिखाने का उठाया बीड़ा

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सूरत। सूरत ऐेसे कर्मवीरों की भूमि रही है जहां जीवन में कुछ कर गुजरने की ठान कर आये लोगों ने सफलता के झंडे गाड़े हैं। फिर वह डायमंड, टेक्सटाईल या फिर रियल एस्टेट का बिजनेस ही क्यों न हो। इसी प्रकार शेयर बाजार भी एक ऐसा ही व्यावसायिक क्षेत्र है जिसमें कइयों ने अपनी अलग पहचान बनाई है। इसी फहरिश्त में एक नाम है रोहन मेहता। 32 वर्ष की युवावस्था में रोहन मेहता देश केसफलतम शेयर बाजार कारोबारियों की श्रेणी में आ खड़े हुए हैं। आज लोकतेज के पाठकों के समक्ष प्रस्तुत है रोहन मेहता के साथ एक बेबाक बातचीत, जो मजूरागेट पर आईटीसी बिल्डिंग में टर्टल वेल्थ मैनेजमेंट के नाम से अपनी कंपनी चलाते हैं। लोकतेज के वे पाठक जिन्हें शेयर बाजार में रूचि है, उन्हें यह वार्तालाप रोचक एवं ज्ञानवर्धक लगेगा।

लोकतेज : रोहन, आपकी पारिवारिक पृष्ठïभूमि एवं शिक्षा के प्रारंभिक दिनों की चर्चा करते हुए कृपया इस बातचीत की शुरूआत करें।
रोहन : मैं मूलभूत रूप से भावनगर का रहने वाला हूं। एक सामान्य परिवार, जिसमें मेरे दादा और पिता का कमीशन एजेंट का व्यवसाय रहा। वैसे उनकी सोच व्यावसायिक तो थी, लेकिन जीवन में अधिक जोखिम लेने से परहेज करते थे। यद्यपि मेरी दादी केख्याल इससे विपरीत थे। वे शुरू से कहा करती थीं, कि जीवन में कुछ बड़ा करना है तो रिस्क तो उठाना ही पड़ता है। उधर मेरा परिवार हमेशा से शिक्षा के प्रति गंभीर रहा है और मेरी स्कूली एवं कॉलेज की पढ़ाई भावनगर में अंग्रेजी माध्यम से हुई। मैंने मैनेजमेंट की पढ़ाई की। पारिवारिक जीवन में कई बार आर्थिक उतार-चढ़ाव से रुबरू होने के नाते मन के किसी कोने में यह बात घर कर चुकी थी कि कुछ भी हो जाए, पैसा तो बनाना है और जैसा कि दादी ने सीख दी थी कि जोखिम उठाओगे तो ही पैसा बनेगा, वरना नहीं। इसी सोच को लेकर मैं आगे बढ़ा। लेकिन मैं शेयर बाजार से जुडूंगा, इसका सपने में भी ख्याल नहीं था।

लोकतेज : … तो शेयर बाजार के व्यवसाय में कैसे आ गए? आपके परिवार का भी इस क्षेत्र से दूर-दूर का कोई नाता नहीं है।
रोहन : शेयर बाजार में करियर बनना एक संयोग ही कहा जायेगा। मैनेजमेंट की पढ़ाई के दौरान एक म्युच्युअल फंड कंपनी में समर-ट्रेनिंग का अवसर मिला, और वहीं शेयर बाजार से रूबरू हुआ। मार्केटींग में रूचि थी, इसलिये वर्ष 2007 में घर-घर जाकर म्युच्युअल फंड बेचने से करियर की शुरूआत की। इसी दौरान शेयर बाजार में रिलायन्स पावर का आईपीओ आया था। मैंने भी पिताजी से 50 हजार रूपये उधार मांगे। पिताजी ने कहा कि अपनी पीढ़ी में किसी ने कभी शेयर नहीं खरीदा है, क्यों इस चक्कर में पड़ता है। लेकिन मेरे दादाजी की सिफारीश पर मुझे रकम मिल गई। मैंने इस आशा के साथ आरपीएल के शेयर के लिये आवेदन किया कि कंपनी के बाजार में सूचीबद्घ होते ही 10प्रतिशत मुनाफे पर शेयर बेचकर पिताजी का उधार चुकाकर 5 हजार रूपये में अच्छा सा आईपोड खरीद लूंगा! लेकिन जैसा शेयर बाजार में आम तौर पर होता है, ट्रेडिंग में छोटा-मोटा मुनाफा हुआ और छह-सात महीनों में भारी नुकसान के चलते पिताजी की दी हुई पूंजी साफ हो गई। मेरी रातोंकी नींद हराम हो गई थी कि यह उधार कैसे चुकाऊंगा। उसी दौरान मुझे सूरत की एक फायनान्स कंपनी में ब्रांच मैनेजर की नौकरी मिली और मैं सूरत आ गया। शेयर बाजार से दूर रहने की पिताजी की सूचना के बावजूद मन में यह प्रश्न बार-बार कौंध रहा था कि बाजार में नुकसान हो रहा है, लेकिन कमाई का भी रास्ता इसी में नीहित है। साथ ही शेयर बाजार का व्यवसाय कोई गलत काम नहीं है। कुछ तो ऐसा है जिससे मैं अनजान हूं और उसी को सीखने की ललक मुझमें समा गई। सूरत में नौकरी के दौरान मैंने शेयर बाजार की बारिकियों को समझना शुरू किया। अच्छी कंपनियों के बारे में रिसर्च करना सीखा।

लोकतेज : नौकरी करते-करते खुद की कंपनी कैसे खोल ली?
रोहन : झवेरी सिक्योरिटीज़, एबीएन एमरो, आनंद राठी, जैनम आदि कंपनियों में नौकरी के दौरान मेरे सीखने का क्रम जारी रहा। निजी स्तर पर मेरा शेयर बाजार में छोटा-मोटा काम जारी था। इसी दौरान मैंने मेरे सहकर्मियों से भी लगभग 75 हजार रूपये उधार लिये। 2007 के वर्ष में बाजार में भारी तेजी थी और मैंने 4-5 लाख रुपये बना लिये। सारा उधार चुका दिया। बाजार में वर्ष 2008 में आई ऐतिहासिक मंदी का भी अनुभव लिया। यद्यपि तब तक मैं यह सीख चुका था कि बाजार में नुकसान से कैसे दूर रहना और मुनाफे को कैसे बढ़ाना। मैं यह जान चुका था कि ट्रेडिंग एवं इन्वेस्टिंग सट्टा नही लेकिन एक विज्ञान है। इसी समयावधि में ट्रेडिंग एवं इन्वेस्टिंग सिस्टम की ट्रेनिंग का चलन चला। मेरा इस ओर रुझान बढ़ा और मैंने नौकरी में रहते लोगों को शेयर बाजार में ट्रेडिंग और इन्वेस्टिंग के गुर सिखाने शुरू किये। इन्हीं तमाम अनुभवों के बाद मैंने कुछेक सहकर्मियों के साथ मिलकर टर्टल वेल्थ मैनेजमेंट के नाम से खुद की कंपनी शुरू की। प्रारंभ से कंपनी के नीति-नियम कड़े बनाये रखे और जिन-जिन लोगों को ट्रेनिंग दी थी, वे हमसे काफी प्रभावित रहे और इन्हीं हालातों में हमारा काम-काज चल पड़ा और फिर हमने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

लोकतेज : भविष्य की क्या योजनाएं हैं?
रोहन : इस कारोबार से हम और हमारे साथ जुड़े लोग संपन्न तो होंगे, इसमें कोई संशय नहीं है। लेकिन इसके उपरांत हमारे भविष्य के कुछ लक्ष्य बिलकुलस्पष्टï हैं। पहला, हम शेयर बाजार का कारोबार नैतिक ढंग से करना चाहते हैं। किसी जमाने में सूरत में हीरों को तराशने का काम करने वालों को ‘हीरा-घसू’ कहकर पुकारा जाता था। लेकिन आज जब डायमंड बिजनेस की छवि सुधरी तो हीरा तराशने वालों को सम्मान की नजर से देखा जाने लगा है। उसी प्रकार शेयर बाजार के कारोबारियो को सट्टेबाजों की दृष्टि से न देखा जाए, इसके लिये हम हमारी कंपनी के स्तर पर हर संभव प्रयास कर रहे हैं। दूसरा लक्ष्य है ट्रेडिंग को बिजनेस का रूप देना। हम लोगों को इस कारोबार के साथ जोडऩा चाहते हैं जिसमें अपार संभावनाएं भरी पड़ी है। टर्टल इन्क्यूबेटर हमारी कंपनी द्वारा इसी दिशा में उठाया गया कदम है।

लोकतेज : आपके अनुसार सफलता के क्या मायने हैं? सफल होने और उसके बाद सफलता को निरंतर बनाये रखने के लिये क्या करना चाहिये?
रोहन : मेरे हिसाब से सफलता का अर्थ है परिणाम की चिंता किये बगैर लक्ष्य की प्राप्ति के लिये 100प्रतिशत प्रयास करना है। शेयर बाजार की भाषा में कहूं तो किसी स्टॉक को खरीदने से पहले मैं हर प्रकार से रिसर्च करते हुए सारे तयशुदा नियमों का पालन करके निवेश करता हूं और बावजूद इसके यदि पोजीशन नकारात्मक रहती है, तो भी मैं अपने आपको सफल ही मानूंगा। क्योंकि परिणाम पर किसी का बस नहीं होता। लेकिन बार-बार प्रयास करने पर इच्छित फल मिलता ही है। सफलता का चरम-बिंदू क्या है यह तो मैं आज भी नहीं जान पाया हूं। फिर भी कह सकता हूं कि यदि व्यक्ति अपनी, अपने परिवार की जरूरतों की पूर्ति करते हुए सबको खुश रख सकता है तो वह सफल है। जहां तक सफलता को कायम रखने का प्रश्न है, तो कह सकता हूं किअच्छी संगत में रहो। सफल व्यक्तियों के साथ ऊठो-बैठो, अच्छी आदतें डालो और अच्छी पुस्तकें पढ़ो। अच्छी आदतों से मेरा मतलब है पौष्ठिक आहार लेना, सेहत का ध्यान रखना, परिवार को पूरा समय देना, फिजूल खर्च न करना, सकारात्मक सोच बनाये रखना और अपने काम व लक्ष्य के प्रति समर्पित रहना।

लोकतेज : कहावत है पैसा हाथ का मैल है। आपके अनुसार पैसे का कितना महत्व है?
रोहन : जीवन में खुश रहने के लिये पैसा एक कारण जरूर हो सकता है, लेकिन वह एकमात्र कारण नहीं है। जीवन में दो प्रकार की वस्तुएं होती हैं – पहली जिसका कोई मोल नहीं और दूसरी जिन्हें पैसों से पाया जा सकता है। उदाहरण स्वरूप संबंध, सेहत – इन्हें आप पैसा देकर नहीं पा सकते। दूसरी ओर यदि बच्चे को बेहतरीन शिक्षा देनी है तो उसका मूल्य चुकाना होता है। दोनों का अपना महत्व है।

लोकतेज : आपकी कोई पसंदीदा फिल्म, पुस्तक?
रोहन : मेरे लिये जीवन में प्रेरणादायी पुस्तकें गीता और बाईबल रहीं। जहां तक फिल्मों का संबंध है तो मैं परिवार के साथ महीने में एक फिल्म अवश्य देखता हूं। यद्यपि मुझे रूचि है प्रेरणादायी फिल्में देखने की और इस श्रेणी में मेरी पसंदीदा फिल्में हैं ‘बर्न्ट’ और ‘फेसिंग द जायन्ट्स’।

लोकतेज : आपसे रूबरू हों और शेयर बाजार संबंधी सवाल न हो, तो कैसे चलेगा। कहते हैं शेयर बाजार एक प्रकार से सट्टाबाजार है और इसमें पैसा कमाना काफी मुश्किल है। आपकी टिप्पणी।
रोहन : दृष्टि का फर्क है। यदि इस काम को बिजनेस की दृष्टि से देखा जाय तो यह किसी भी रूप में सट्टेबाजी नहीं है। शेयर बाजार में हम क्या करते हैं – बेहतरीन मैनेजमैंट और बाजार में प्रतिष्ठावान कंपनियों के शेयर खरीदकर उनमें हिस्सेदारी लेते हैं। यदि इन्हीं नियमों का पालन करते हुए काम करता हूं तो कहीं कोई बुराई नहीं है। अलग ढंग से समझें तो अन्य किसी भी प्रकार के प्रोफेशन से पहले व्यक्ति उस विषय के संबंध में वर्षों-वर्ष अभ्यास करके पूरा ज्ञान प्राप्त करता है, ट्रेनिंग लेता है और धैर्य के साथ अनुभव हासिल करते हुए आगे बढ़ता है। इसके विपरीत शेयर बाजार की राह मुश्किल इसलिये हो जाती है क्योंकि व्यक्ति यहां कदम पहले रखता है, बगैर जानकारी व ज्ञान के पसीने की कमाई झोक देता है। स्वाभाविक है इस प्रकार कामयाबी नहीं मिल सकती। वास्तव में व्यक्ति को पहले ट्रेडिंग और इन्वेस्टिंग के विषय की तालीम लेनी चाहिये, फिनान्श्यिल एडवाईजर से सलाह लेनी चाहिये, इस क्षेत्र में सफल हुए लोगों की पुस्तकेंपढऩी चाहिये और फिर हाथ आजमाना चाहिये। वैसे भी दुनिया में पैसा बनाने केकेवल दो ही रास्ते हैं एक्विटी एवं रियल एस्टेट।

लोकतेज : यह भी एक कहावत है कि शेयर बाजार में केवल 5 प्रतिशत लोग पैसा बनाते हैं। आखिर वो 95 प्रतिशत लोग क्यों असफल हो जाते हैं?
रोहन : कई तकनिकी कारण हैं। मुख्य चार-पांच बातें गिनाऊं तो मुनाफे में जल्दी निकल जाना और नुकसान में लंबे समय तक बने रहना। सीधा सा उदाहरण है – आप व्यवसाय कर रहे हैं और आपने 10 मार्केटींग एक्जीक्यूटीव रखे हुए हैं। आप उनमें से किहें निकालोगे? जो आपकी सेल्स में वृद्घि कर रहे हैं उन्हें, या जिनका प्रदर्शन सबसे खराब है? अवश्य ही आप उन्हें निकालेंगे जो लाभ नहीं पहुंचा रहे। इसके विपरीत निवेशक क्या करते हैंं? पोर्टफोलियो के उन शेयरों को बेच देते हैं जो अच्छा रिटर्न दे रहे हैं, और उन शेयरों में बने रहते हैं जो नुकसान में हैं। दूसरा, जो सबसे बड़ी समस्या है – नुकसान में पड़े शेयरों को एवरेज करना। शेयर के दाम गिरते हैं और लोग हर गिरावट पर उसी शेयर में एवरेज करते जाते हैं। इससे पूंजी लगातार टूटती चली जाती है। तीसरा, शेयर बाजार में तेजी के साथ-साथ मंदी के दिनों में भी ट्रेड किये जा सकते हैं। इस सुविधा का भी लाभ लिया जाना चाहिये। चौथा, जो काम कर रहे हो, उसे सीखो। भले उसके लिये पैसा खर्च करना पड़े। यह खर्च उस नुकसान से तो बेहतर ही है, जो अज्ञान और नासमझी केकारण होता है। सीधा सा फंडा है – आप एक रूपया ज्ञान प्राप्त करने केे लिये खर्च करोगे तो दस रूपये कमाओगे। पांचवा, अच्छे फायनाश्यिल एडवाईजर से सलाह लेना।

लोकतेज : बाजार में ट्रेडरों की तुलना में इन्वेस्टरों की कहानियां काफी सुनने को मिलती हैं। आपको क्या लगता है एक आम निवेशक को ट्रेडिंग करनी चाहिये या इन्वेस्टिंग?
रोहन : बेशक इन्वेस्टरों की कहानियां ज्यादा चर्चा में रहती हैं। इसका सीधा कारण है कि पहले सूचना क्रांति का लाभ आम लोगों तक नहीं पहुंचा था। शेयर बाजार में निवेश की प्रक्रिया लंबी, जटिल व वर्ग विशेष तक सीमित थी। लेकिन अब कंप्यूटर घर-घर पहुंच गया है। आने वाले बीस वर्ष में आप सफल ट्रेडरों की कहानियां सुनेंगे। ट्रेडिंग और इन्वेस्टिंग दोनों साथ-साथ चलेंगे। ट्रेडिंग बजनेस है जो कैश-फ्लो प्रदान करता है और इन्वेस्टिंग से वेल्थ क्रियेशन होता है।

लोकतेज : आप ट्रेडिंग की वकालत करते हैं। ट्रेडिंग एक फूल-टाईम एक्टिविटी है या पार्ट-टाईम भी मैनेज हो सकती है?
रोहन : निसंदेह ट्रेडिंग एक फूल-टाईम एक्टिविटी है। यह एक स्किल है और इसे सीखना पड़ेगा। उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ेगा। इसे आप कुछ घंटों की कार्य-सीमा में नहीं बांध सकते। हां, जिनका अपना व्यवसाय या नौकरी है और पूरा समय नहीं दे सकते तो उन्हें इन्वेस्टिंग करनी चाहिये या किसी वेल्थ मैनेजमेंट सेवा प्रदान करने वाले की मदद लेनी चाहिये।

लोकतेज : शेयर बाजार में कदम रखने वाले बहुतया रातों-रात करोड़पति बनने के ख्वाब देखते हैं। आप उन्हें बाजार से औसतन कितनी आय की अपेक्षा रखने की सलाह देते हैं?
रोहन : भारत में शेयर बाजार से औसतन 15 से 18प्रतिशत सीएजीआर की दर से रिटर्न की अपेक्षा रखी जा सकती है।

लोकतेज : अंत में आपकी कंपनी टर्टल वेल्थ आम निवेशकों को किस रूप में सहायभूत हो सकती है?
रोहन : टर्टल वेल्थ कई प्रकार से उपयोगी सिद्घ हो सकती है। आज हम कन्सलटन्सी, फंड मैनेजमेंट एवं एडवाईजरी सेवाएं देते हैं। यदि उद्योगपति, बिजनेसमैन या उच्च पदों पर आसीन लोगों के पास अपनी बचत को बाजार में निवेश करने का ज्ञान या समय नहीं है, तो हम ऐसे फंड मैनेज करते हैं और बाजार में निवेश करते हैं। हम ब्रोकरों और सब-ब्रोकरों आदि को कन्सलटंसी प्रदान करते हैं। इसके अलावा हम लोगों को ट्रेडर बनने की ट्रेनिंग भी देते हैं, जिससे लोग खुद ट्रेडिंग व इन्वेस्टिंग कर सकें। हमने एक नया कन्सेप्ट शुरू किया है ट्रेडर्स इनक्यूबेटर्स। जिसमें हम ट्रेडरों को तैयार करते हैं, हमारा निजी फंड देते हैं और उनसे बाजार में ट्रेडिंग करवाते हैं। इस कनसेप्ट से भविष्य में हमे काफी उम्मीदे हैं। इसके अलावा हमारा प्रोपराईटरी डेस्क बिजनेस बहुत बड़ा है।
आखिर में कहूं तो आज जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूं तो भगवान का शुक्रिया अदा करता हूं कि वे मुझे इस क्षेत्र में लाए क्योंकि मेरे लिये शेयर बाजार से बेहतर काम और कोई हो ही नहीं सकता था।