यवतमाल की आदमखोर शेरनी ढेर, अदालत के आदेश के विरुद्ध कार्रवाई


महाराष्ट्र के यवतमाल जिले में आदमखोर शेरनी के रूप में कुख्यात हो चुकी टी1 बाघिन को अंतत: मौत के घाट उतार दिया गया है।
यवतमाल में आदमखोर शेरनी के रुप में कुख्यात अवनी बाघिन की की मौत के बाद उसकी एटेेप्सी नागपुर में करवाई गई। कथित रूप से इस शेरनी को अवैध ढंग से मौत के घाट उतारे जाने का आरोप है। (Photo : IANS)

नागपुर (ईएमएस)। महाराष्ट्र के यवतमाल जिले में आदमखोर शेरनी के रूप में कुख्यात हो चुकी टी1 बाघिन को अंतत: मौत के घाट उतार दिया गया है। लगभग एक साल तक चली खींचतान और खोज अभियान के बाद शुक्रवार रात मार गिराया गया। यहां के पांढरकवडा में एक के बाद एक इंसानों पर लगातार हो रहे हमलों के चलते नरभक्षी बाघिन की तलाश शुरू की गई थी।

ज्ञात हो कि इस खोज अभियान में 200 से ज्यादा लोगों को लगाया गया था, साथ ही हाथियों और पैराग्लाइडर्स तक की मदद ली गई थी। बाघिन को मारा जाए या नहीं, इसे लेकर कोर्ट की ओर से भी कई बार हस्तक्षेप किया गया था। कोर्ट ने बाघिन को बेहोश करने का आदेश दिया था। इस नरभक्षी बाघिन ने 13 से ज्यादा लोगों को अपना शिकार बनाया था।

टी1 बाघिन को हैदराबाद के शॉर्प शूटर नवाब शाफत अली खान के बेटे असगर (35) ने मार गिराया और इस दौरान उनके साथ वन विभाग का कोई कर्मचारी नहीं था। यह नियमों के खिलाफ है और इसी कारण से बाघिन के मारे जाने के बाद अधिकारी खुलकर बात करने और घटना का जिक्र करने सामने नहीं आए।

वन विभाग ने अपने ही उन ऑर्डर्स का उल्लंघन किया जिनमें हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की ओर से बाघिन को पहले ट्रैंक्विलाइज (बेहोश) करने की कोशिश करने को कहा गया था। कोर्ट की ओर से इसमें सफलता न मिलने पर ही बाघिन के खिलाफ जानलेवा कदम उठाने को कहा गया था।

हालांकि बीते एक साल से चल रहे खोज अभियान में एक बार भी बाघिन को पकड़ने की कोशिश नहीं की गई। सूत्रों के मुताबिक मौके पर बाघिन के शरीर में एक डार्ट (बेहोश करने का इंजेक्शन) जरूर लगा दिखा, लेकिन ऐसा लग रहा था कि उसे बाद में हाथ से चुभाया गया हो। पूरी फरेंसिक और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि बाघिन को बेहोश करने की कोशिश की गई थी या नहीं। स्थानीय लोगों की मांग हमेशा से इस बाघिन को मारने की थी, क्योंकि बाघिन 13 से ज्यादा लोगों पर जानलेवा हमले कर चुकी थी।

ज्ञात हो कि हमलों में मरने वालों की बढ़ती संख्या के चलते कुछ स्थानीय लोगों और नेताओं ने बाघिन को जान से मारने की मांग की थी। अगस्त में हुई तीन मौतों के बाद गांववालों में बेशक आक्रोश हो, लेकिन पशुओं के खिलाफ जानलेवा कदम को सुप्रीम कोर्ट की ओर से मंजूरी नहीं दी गई और गैरकानूनी ठहराया गया था। इसी साल 29 जनवरी को बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने टी1 को गोली मारने के आदेश पर रोक लगा दी थी।

अगस्त में दो और मौतों के बाद विभाग ने दूसरा ऑर्डर जारी किया था और उसपर भी पहले हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई थी। जंगल में बनाए गए मचानों पर रेंजर्स लगातार निगरानी कर रहे हैं और बाकी रेंजर्स को इस ऑपरेशन की तैयारी में लगाया गया था। हाथियों पर सवाल होकर ट्रैंक्विलाइजर गन्स (बेहोश करने वाली बंदूकों) के साथ शार्प शूटर्स भी आदमखोर बाघिन की तलाश पर निकले थे। बाघिन को कैद कर पास के एक चिड़ियाघर में भेजने की योजना बनाई गई थी। ऐसे में बाघिन को मारे जाने पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

शेरनी की मौत के बाद स्थानीय लोगों ने खुशियां मनाई।