पिता ने अपने नौ साल के बेटे के लिए मांगी इच्छामृत्यु


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चेन्नई । मद्रास हाईकोर्ट ने एक चिकित्सा विशेषज्ञ समिति को नौ वर्षीय एक बालक की जांच करने के निर्देश दिए हैं। इस बालक के पिता आर थिरूमेनी ने अपने पुत्र के लिए दयामृत्यु के लिए याचिका लगाई थी। अदालत ने तीन विशेषज्ञों की टीम को जांच के निर्देश दिए कि क्या यह मामला सतत निष्क्रियता स्थिति संबंधी मापदंड के अंतर्गत आता है। क्या इस बच्चे के इलाज की कोई गुंजाइश बाकी बची है। आर थिरूमेनी ने अदालत का रूख करके अपने बेटे के लिए इच्छामृत्यु की अनुमति दिए जाने का अनुरोध किया है।

याचिकाकर्त्ता ने कहा कि बच्चा 30 सितम्बर,2008 को जन्म के बाद से ही निष्क्रिय है। टी. प्रवीनधन को मिर्गी के दौरे भी पड़ते हैं। यह तंत्रिका तंत्र की बीमारी है। इस बीमारी में दौरा पड़ने पर रोगी अपना दिमागी संतुलन खो बैठता है। उसे एक दिन में 10 से 20 बार दौरे पड़ते हैं, जिसे दवाओं द्वारा नियंत्रित किया जाता है। पेशे से एक दर्जी थिरुमेनी को दवा खर्चों को पूरा करने के लिए 10,000 रुपए प्रति माह खर्च करना पड़ता है। याचिकाकर्ता थिरुमेनी ने अदालत को बताया कि चिकित्सकों ने कहा है कि बच्चे की स्थिति में सुधार की कोई गुंजाइश नहीं है। थिरुमेनी ने अदालत से आग्रह किया कि वह उसे अपने बेटे को भोजन, पोषण और दवाएं नहीं दिए जाने की अनुमति दे ताकि उसकी मौत की प्रक्रिया को सुगम बनाया जा सके।