बारडोली : भेड़-बकरी की तरह टेम्पो में लदे विद्यार्थी परीक्षा देने जाते हैं


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अधिकांश शाला संचालकों को अपनी संस्थाओं में वसूले जाने वाली फी में ही रूचि होती है। विद्यार्थियों को सुविधाएं देने से वे हमेशा कतराते रहते हैं। इन दिनों गुजरात की कक्षा १० एवं १२ की बोर्ड की परीक्षाएं चल रही हैं। सूरत-तापी अंचल के दूर-दराज की गांवों में पढ़ने वालों बच्चों के परीक्षा केंद्र भी सुदूर गावों व शहर में होने से बच्चे लंबा सफर कर परीक्षा देने पहुंचते हैं। विद्यार्थियों को परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने के लिये स्कूलों द्वारा शुल्क लेकर टेम्पो की व्यवस्था की है। चित्र में देखिये, स्कूल संचालकों ने बच्चों को कैसे टेम्पो में भेड़-बकरियों की तरह लाद रखा है। यदि बच्चों के साथ कोई दुर्घटना घट जाए तो कौन जिम्मेदार रहेगा?

उल्लेखनीय है कि शिक्षा विभाग द्वारा ऐसे निर्देश जारी किये गये हैं कि विद्यार्थियों को किसी खुले वाहन, टेम्पो में सवारी न कराई जाए और ऐसा करते हुए कोई शाला पाई गई तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जायेगी।

एक रिपोर्ट के अनुसार बारडोली तहसील के मोता गांव में स्थित एकलव्य शाला में अभ्यासरत विद्यार्थियों को परीक्षा केंद्र पर खुले टेम्पो में ले जाया जा रहा है। ज्ञातव्य है कि कुछ समय पहले बारडोली की ही आश्रम शाला के संचालक बच्चों को कीम में आयोजित गांधी मेले में ले जा रहे थे तब टेम्पो पलट गया था। सौभाग्य से कोई जानहानि नहीं हुई।

इस बारे में एकलव्य शाला के आचार्य ने मीडिया को बताया कि वे अभी मेटरनिटी लीव पर हैं इसलिये पूरे मामले से वे अनजान हैं। अन्य शिक्षकों से संपर्क के लिये नंबर मांगने पर उन्होंने कहा कि शाला में छुट्टी होने से किसी का संपर्क नहीं हो पायेगी। क्या शिक्षा विभाग द्वारा ऐसे स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होनी चाहिये?