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चादर देख कर पैर फैलाये प्रणब ने

वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने वर्ष २००९-१० के लिए प्रस्तुत बजट में जो कर प्रस्ताव रखे हैं उनसे ही सरकार के इरादों और रणनीति का अहसास हो जाता है। पहली बार भारत का बजट अनुमान १० लाख करोड़ रूपये को पार कर पाया है। यह अपने आप में एक कीर्तिमान है तथा वैश्र्िवक मंदी के मौजूदा दौर से भारतीय अर्थव्यवस्था को बाहर निकालने के लिए भारत सरकार के जुझारू मूड की ओर इशारा कर रहा है। देश के प्रमुख बैंक प्रमुखों ने भी माना है कि अधिकांश कर दरों को नहीं छूने के कारण आम आदमी के हाथों में तुलनात्मक रूप से अधिक धन होगा जिसका सकारात्मक प्रभाव बाजार में देखने को मिलेगा। सरकार अप्रत्यक्ष रूप से पूंजी-जुटाने में प्राइवेट सेक्टर ओर प्राइवेट फाइनेंस का सहयोग मिलने के लिए भी काफी आशान्वित है। इस बजट से जाहिर है कि मंदी के चलते सरकार की आमदनी कम हुई है परंतु वह इसे लेकर विचलित नहीं हैं दरअसल, प्रणब मुखर्जी का बजट न तो झूठे सपने दिखाने वाला है, न इसमें कहीं से आंकड़ों का खेल समझ में आता है और न ही-चादर से पैर बाहर जाने वाली बात है। वित्तमंत्री ने जितनी चादर उतना ही पैर पसारने वाली पंक्ति को चरितार्थ करने की कोशिश की है। हां उन्होंने वास्तविकता को समझते हुए आम लोगों को राहत देने का प्रस्ताव रखा है। वहीं जिन क्षेत्रों में अधिक ध्यान दिये की दिये की जरूरत है वहां उन्होंने बजट आवंटन बढ़ाया भी है। इनमें हाइवे खर्च, कृषि कर्ज, कृषि के लिए आवंटन, शहरों में झुग्गीवासियों का सミमानजनक ढंग से पुनर्वास, पुलिस के आधुनिकीकरण, रक्षालय जैसे मुद्दे शामिल हैं। वित्त मंत्री ने घरेलू बचत को बढ़ावा देते हुए सबका विकास करने का लक्ष्य रखा है। बेरोजगारों का ध्यान रखा गया है तथा शिक्षा और स्वास्थ्य पर भी बजट में जोर दिया गया है। हालांकि आयकर सीमा छूट में अधिक वृद्धि नहीं की गई है लेकिन अर्थ व्यवस्था के समक्ष खड़ी चुनौतियों के मद्देनजर महिलाओं के लिए आयकर छूट सीमा में १५ हजार र्पिये और पुर्षिों के संदर्भ में १० हजार र्पिये की वृद्धि का लोग स्वागत करेंगे। वास्तव में प्रणब मुखर्जी ने रस्सी पर चलते हुए संतुलन बनाये रखने की इच्छाशक्ति दर्शायी है। वह जहां विकास और कल्याणकारी कार्यों पर व्यय को बढ़ा रहे हैं, वहीं वित्तीय घाटे को नियंत्रित रखने की चुनौती से उन्हें जूझना है। अर्थ व्यवस्था में एक बार पुनः उछाल लाने के लिए सरकार को समस्त साधनों से मिलने वाले धन का सही और समुचित वितरण सुनिश्चित करना है। यही काम करने की भावना प्रणव मुखर्जी द्वारा प्रस्तुत बजट में दिखाई दी है। हालांकि इस बजट का शुर्आिती नकारात्मक प्रभाव शेयर बाजार में दिखाई दिया तथा सेंसेक्स एक झटके में ९०० पाइंट का गोता लगा गया। वित्त विशेषज्ञ और शेयर बाजार के महारथियों का मानना है कि जल्द ही मार्केट में मजबूती आ जाएगी। स्वयं वित्त मंत्री मुखर्जी का कहना है कि विकास दर लक्ष्य के अनुसार आ जाएगी। वैसे ऐसा संभवतः पहली बार देखने में आया है जब बजट पर आलोचनाओं की बौछार नहीं दिखाई दे रही है। इक्का-दुक्का प्रतिकूल प्रतिक्रियाओं और राजनीतिक खेमों की बयानबाजी से हटकर देखें तो आम आदमी इस बजट को लेकर परेशान दिखाई नहीं दे रहा। दरअसल, बजट में ''तेरा तुझको अर्पण'' वाली आम भावना दिखाई दे रही है। वित्त मंत्री ने बजट के नाम पर र्पिये का चतुराई से प्रबंधन किया है। वह इस काम में कितना सफल हो पाए इसका प्रमाण आने वाले समय में मिल जाएगा।


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