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भाजपा ने वसुंधरा राजे को राजी किया
जयपुर । भारतीय जनता पार्टी के आलाकमान नितिन गडकरी ने स्वमं के नाम पर विधिवत् इंदौर में हो रही भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में मोहर लगने तक राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को राजी कर लिया है। प्रदेश में हो रहे संगठन चुनाव को रोका फिर राजे का इस्तीफा तो लिया पर उसे अपने पास लॉक कर दिया अब राजस्थान में २२ फरवरी से विधानसभा बजट सत्र आहूत किया गया है और विधानसभा सचिवालय को अभी राजे के स्थान पर गडकरी ने दूसरा नाम नहीं भिजवाया है। आज की तारीख में राजे ही सरकारी तौर पर नेता प्रतिपक्ष है तथा उन्हें सरकार के द्वारा मुहैया कराई सभी सरकारी सुविधाएं मिल रही है। राजे की तल्खी भी पार्टी के प्रति कम हो गई है राजे ने पंचायत चुनावों में पार्टी कार्यालय में आकर सभी बैठकों में भाग लिया और भाजपा को बहुमत दिलाने के लिए काम किया है। आज पंचायत चुनावों का नतीजा सामने आ जाएगा दूसरी ओर प्रदेश अध्यक्ष अरूण चतुर्वेदी ने भी पत्रकारों से बयानों में एवं प्रदेश स्तर पर होने वाली पार्टी के वरिष्ठ नेताओ की बैठकों में राजे को विशेष महत्व देकर उनके प्रति आदर जताने लगे है। प्रदेश अध्यक्ष इन वरिष्ठ नेताओं की बैठक में अध्यक्ष की कुर्सी पर नहीं बैठते और राजे के प्रबल समर्थक माने जाने वाले दो विधायकों ज्ञानदेव आहूजा व राजेन्द्र सिंह राठौड़ के निलंबन को वापस ले लिया गया था। अब भाजपा पूरे देश में अपने जनाधार को बढ़ाने के लिए इंदौर में दो दिन मंथन करेगी तभी प्रदेशों में भाजपा के नेताओं में चल रहा अंर्तद्वद्व समाप्त किया जाएगा। राजस्थान में भी हालांकि अंर्तविरोध समाप्ती की ओर है फिर भी संगठन के रूके चुनाव और नेता प्रतिपक्ष पद पर बना संस्पेंस एवं अध्यक्ष का चुनाव कराने की जिम्मेरी गडकरी के सिर पर ही है जिसे इंदौर की बैठक में तय किया जाएगा की राजस्थान में प्रदेश अध्यक्ष की कमान किसे सौपी जाएं और नेता प्रतिपक्ष का दायित्व वसुंधरा राजे के कंधो पर रहे या फिर किसी अन्य नेता को सौपा जाएं ताकि प्रदेश की गहलोत सरकार ने एक साल मे जो सरकार की नीतियां लागू की है उन पर जनहित में कैसे आंदोलन छेड़ा जाएं। हालांकि वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष अरूण चतुर्वेदी ने केन्द्र की महंगाई और राज्य सरकार की जनविरोधी नीतियों को लेकर आंदोलन करने की चेतावनी पहले ही दे दी थी पर अब इस चेतावनी पर भाजपा की इंदौर बैठक के बाद अमल हो सकेंगा।
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