इंटरनेशनल
लकवे के बाद महिलाओं में अवसाद का खतरा ज्या
वाशिंगटन। पहले किये अध्ययनों का पुनरावलोकन करने से पता चला कि लकवा हो जाने के बाद पुर्षिों की अपेक्षा महिलाएं ज्यादा उदास महसूस करती हैं। जिसका कारण असमर्थता, जीवनशैली में बदलाव और मृत्यु भय माना जाता है। टोरेन्टो विश्र्वविद्यालय के डाक्टर ब्रिटनी पोपेन्टर एमडी ने लकवे और उदासीनता के आपसी संबंध को जानने के लिए ७५००० लोगों का जिनमें १२,००० महिलाएं थी का अध्ययन किया और पाया कि इस बीमारी के और उदासीनता के बीच दो हफ्ते से लेकर १५ साल तक समय लग सकता है। उन्होंने अपने अध्ययन के दौरान यह देखा कि लकवे के बाद उदासीनता की दर पुर्षिों की अपेक्षा महिलाओं में अधिक होती है। उन्होंने बताया आमतौर से लोग लकवे को पुर्षिों में होने वाली बीमारी मानते हैं लेकिन ऐसा नहीं है। बढ़ती उम्र के साथ महिलाएं भी इससे प्रभावित होती हैं क्योंकि वह ज्यादा समय जीती हैं। इंडिया वेपोलिस मेडिकल सेंटर की तंत्रिका विज्ञानी डॉ. लिन्डा एस बिलयミस एमडी ने बताया कि लकवे के बाद होने वाली उदासीनता को अक्सर न तो मरीज और न ही प्रबंधकर्ता पहचान पाता है। मरीज में ऐसे लक्षणों को लकवे के बाद प्राकृतिक बदलाव मान लिया जाता है जबकि इसके लिए उसादीन विरोधी चिकित्सा के साथ उसके आत्म विश्र्वास को बढ़ाने की जरूरत होती है।
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