आतंक के खिलाफ भारतीय सेना का कड़ा रुख, पांच बड़े शौर्य की गाथाएं


केंद्र सरकार आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर चल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार लगातार देश के दुश्मनों को सीधे जवाब दे रही है।
Photo/twitter

नई दिल्ली। केंद्र सरकार आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर चल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार लगातार देश के दुश्मनों को सीधे जवाब दे रही है। भारत की सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार किया हुआ है। अभी हाल ही में पुलवामा हमले के बाद पाकिस्तान के बालाकोट में घुसकर आतंकियों के ठिकानों को तबाह किया गया था। इस एयर स्ट्राइक के बाद म्यांमार में सेना ने आतंकी ठिकानों पर बड़ी कार्रवाई की गई। वैसे तो सेना के कई किस्से चर्चित रहे पर 5 पराक्रम है जिसके चलते आतंकी संगठनों के झक्के छूट गए हैं।

Photo/Twitter

जून 2015 में मणिपुर में बड़ा उग्रवादी हमला हुआ था। मणिपुर के चंदेल जिले में उग्रवादी संगठन पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के हमले 20 भारतीय जवान शहीद हो गए थे। इसको लेकर देश में आक्रोश का माहौल था। इसके बाद भारतीय सेना ने म्यांमार सीमा के अंदर घुसकर इस हमले को अंजाम देने वाले उग्रवादियों को मौत की नींद सुला दिया। सरकार ने एक हफ्ते के अंदर हमले का बदला ले लिया था। 18 सितंबर को जैश-ए-मोहम्मद फिदायीन दस्ते ने भारतीय सेना की 12 ब्रिगेड के एडमिनिस्ट्रेटिव स्टेशन पर हमला किया था। उरी में हुए इस हमले में 19 जवान शहीद हो गए थे। इसके बाद सेना 28-29 सितंबर की रात को पाकिस्तान की सीमा में घुसकर आतंकी ठिकानों का सफाया किया। इसमें आतंकियों के लांच पैड को निशाना बनाया गया। देश की मीडिया में पहली बार ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ शब्द जोरों शोरों से गूंज रहा था।

जैश-ए-मोहम्मद ने एक बार फिर देश के माहौल को खराब करने की कोशिश की। पुलवामा में आरपीएफ की बस पर हुए आत्मघाती हमले को अंजाम दिया गया। इसके बाद भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में घुसकर बड़ा हमला किया। इस हमले में जैश के ठिकानों पर बम गिराए गए। इस स्ट्राइक को पाकिस्तान ने भी कबूला।

पूर्वोत्तर के लिए महत्वपूर्ण मेगा बुनियादी ढांचा परियोजना के लिए कुछ उग्रवादी खतरा बन रहे थे। इसके बाद भारतीय सेना ने म्यांमार सेना के साथ मिलकर बड़ी कार्रवाई की है। म्यांमार का विद्रोही समूह अराकान आर्मी ने मिजोरम सीमा पर नए ठिकाने बनाए थे। सेना लगभग 10 से 12 उग्रवादी ठिकानों का सफाया किया है। इस ऑपरेशन को ‘ऑपरेशन सनराइज’ का नाम दिया गया। मोदी सरकार ने न सिर्फ देश बाहर आतंकियों का सफाया किया, बल्कि घर के अंदर भी आतंकियों का सफाया किया गया है। 2014 से 2018 के बीच लगभग 800 से अधिक आतंकवादी मारे गए हैं। इसमें सेना ने बड़े आतंकियों पर भी कार्रवाई की है। पुलवामा हमले के बाद सेना ने बताया था कि जैश के 6 टॉप कमांडरों को मार गिराया गया था।

–  ईएमएस