टाइम बम पर बैठी हैं दूरसंचार कंपनियां


सरकार और बैंकों ने बकाया और कर्ज वसूल करने की प्रक्रिया शुरू की, तो दूरसंचार कंपनियां न्यायालय के दरवाजे पर पहुंच गई।
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7000 अरब का कर्ज़ दूरसंचार कंपनियों पर

नई दिल्ली। भारतीय दूरसंचार कंपनियां कर्ज के टाइम बम पर बैठी हुई हैं। सरकार और बैंकों ने बकाया और कर्ज वसूल करने की प्रक्रिया शुरू की, तो दूरसंचार कंपनियां न्यायालय के दरवाजे पर पहुंच गई। अदालत का फैसला आने के बाद इन कंपनियों की आर्थिक स्थिति स्पेक्ट्रम की राशि बैंक का कर्ज और ब्याज चुकाने की भी नहीं है। कंपनियां अपनी देनदारी चुकाने से बचने के लिए कई वर्षों से न्यायालय में मामला लंबित करा रखा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार दूरसंचार कंपनियों पर स्पेक्ट्रम शुल्क बैंकों का कर्ज और जुर्माने के रूप में लगभग 7000 अरब रुपए की देनदारी है। वित्त वर्ष 2018 में दूरसंचार कंपनियों का सकल राजस्व 2500 अरब रुपए होने की संभावना है। इन कंपनियों के ऊपर इस से 3 गुना ज्यादा देनदारी है। कंपनियों ने अपनी बैलेंस शीट में इस देनदारी को चुकाने के लिए अलग से कोई प्रावधान नहीं किया है। जिसके कारण स्पष्ट है कि न्यायालय का फैसला आने पर यह कंपनियां अपनी देनदारी चुका पाने में पूर्ण रूप से अक्षम होंगी।

सूत्रों के अनुसार रिलायंस जिओ और और काम के बीच में भी सौदे को लेकर जो गतिरोध बना हुआ है। उसके पीछे स्पेक्ट्रम भुगतान के मामले और न्यायालयीन विवाद के अनुसार भुगतान करने की जिम्मेदारी को लेकर है। जिओ का कहना है आरकॉम के स्पेक्ट्रम का भुगतान जिओ नहीं करेगी। जिसके कारण यह सौदा टलता चला जा रहा है। वहीं अनिल अंबानी समूह के आर काम पर सुप्रीम कोर्ट भी देनदारी की तलवार लटकाए हुए हैं।

दूरसंचार कंपनियों पर सबसे ज्यादा बकाया स्पेक्ट्रम और लाइसेंस फीस के रूप में बकाया है। दूरसंचार कंपनियां केवल दूरसंचार सेवाओं से मिलने वाले राजस्व के आधार पर भुगतान करने का दबाव सरकार पर बना रहे हैं। वही स्पेक्ट्रम और लाइसेंस की शर्तों का पालन करना दूरसंचार कंपनियों के लिए बा देता है। लेकिन टेलीकॉम कंपनियां अपनी आर्थिक स्थिति का हवाला देकर सरकार से सहायता मांग रही हैं। जिसके कारण यह मामला कई वर्षों से अदालतों में लंबित है।

कांग्रेस ने स्पेक्ट्रम घोटाले को लेकर 68000 करोड़ रुपए का आरोप मोदी सरकार पर लगाया है। कैग की रिपोर्ट को आधार बनाकर कांग्रेस में जो मोर्चा खोला है। उसमें सरकार और टेलीकॉम कंपनियां दोनों ही निशाने पर हैं। ऐसी स्थिति में कहा जा रहा है कि कर्ज के बोझ से दबी टेलीकॉम कंपनियां अब टाइम बम की तरह है जिसमें कभी भी विस्फोट कर सकता है। वहीं 2जी घोटाले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरह से काल्पनिक घोटाले में मनमोहन सरकार को चुनाव में हरा दिया था, किंतु अब कांग्रेस के हाथ में काल्पनिक नहीं वास्तविक घोटाला हाथ लगा है। कांग्रेस इस मामले में कितना सफल होती है यह कहना मुश्किल है।

– ईएमएस