सिख दंगों के दोषी सज्जन ने मंडोली जेल की बैरक नंबर १४ में गुजारी रात


मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट अदिति गर्ग ने हाईकोर्ट के आदेश की प्रति देखने के बाद मंडोली जेल भेज दिया, जहां उन्हें बैरक नंबर १४ में रखा गया।
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नई दिल्ली। नवंबर १९८४ सिख विरोधी दंगों के मामले में दोषी पूर्व सांसद सज्जन कुमार ने सोमवार दोपहर बाद अदालत के समक्ष समर्पण कर दिया। दो अन्य दोषी महेंद्र यादव व कृष्ण खोखर ने इससे पहले ही अदालत में समर्पण किया था। मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट अदिति गर्ग ने हाईकोर्ट के आदेश की प्रति देखने के बाद तीनों को मंडोली जेल भेज दिया, जहां उन्हें बैरक नंबर १४ में रखा गया। कोर्ट में पहुंचते ही सज्जन के अधिवक्ता ने मजिस्ट्रेट को बताया कि उनका मुवक्किल हाईकोर्ट के आदेशानुसार समर्पण करने आया है। उन्होंने आवेदन दायर कर मुवक्किल के जीवन को खतरा बताया और उन्हें अलग वैन से जेल ले जाने और अदालत में पेशी के लिए भी अलग वैन उपलब्ध करवाने का आग्रह किया है। मजिस्ट्रेट ने इसे स्वीकार करते हुए इस बाबत जेल प्रशासन को निर्देश जारी कर दिए। पूरी प्रक्रिया के दौरान सज्जन सिर झुकाए चुपचाप खड़े रहे। इससे पहले सज्जन कुमार सुबह ७.३० बजे ही घर से निकल गए थे। हालांकि, इसके बाद वह कहां गए, इसका पता नहीं चल सका। दोपहर बाद करीब २.०५ मिनट पर वह कड़कड़डूमा अदालत पहुंचे। कार में उन्होंने सिर झुकाया हुआ था। लिफ्ट से अदालत जाते समय उन्होंने ग्रे कलर के मफलर से अपना चेहरा ढक रखा था। गौरतलब है कि नवंबर १९८४ दंगों के मामले में निचली अदालत ने सज्जन कुमार को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था। हाईकोर्ट ने १७ दिसंबर को निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए उन्हें मामले में दोषी ठहराया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दो अन्य की सजा बढ़ाकर १०-१० वर्ष कर दी। सज्जन कुमार को ३१ दिसंबर तक समर्पण का आदेश दिया गया। सज्जन की ओर से समर्पण के लिए एक माह का अतिरिक्त समय की मांग संबंधी आवेदन को भी खारिज कर दिया।

– ईएमएम