देशभर के 85 लाख स्कूली शिक्षकों का बनेगा प्रोफाइल


इस प्रोफाइल में सरकारी और निजी स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों की शैक्षिक योग्यता, ट्रेनिंग, रिटायरमेंट और तबादले से लेकर अन्य जानकारियां होंगी।
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नई दिल्ली । केंद्र सरकार पहली बार देशभर के ८५ लाख से अधिक स्कूली शिक्षकों का प्रोफाइल तैयार कर रही है। इस प्रोफाइल में सरकारी और निजी स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों की शैक्षिक योग्यता, ट्रेनिंग, रिटायरमेंट और तबादले से लेकर अन्य जानकारियां होंगी। स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के मकसद से तैयार होने वाले प्रोफाइल से शिक्षकों की कमियों को ट्रेनिंग के माध्यम से दूर करते हुए फर्जी शिक्षकों पर गाज गिरेगी। केंद्र सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के मकसद से राज्यों से शिक्षकों का रिकॉर्ड तैयार करवाया जा रहा है। देशभर में २६ से अधिक राज्यों के पास शिक्षकों का पूरा रिकॉर्ड तक उपलब्ध नहीं है। इसी के चलते ढाई लाख से अधिक स्कूल एक शिक्षक तो हजारों स्कूल बिना शिक्षक के चल रहे हैं, जबकि हजारों स्कूलों में एक ही शिक्षक विज्ञान, गणित, अंग्रेजी भाषा की पढ़ाई करवा रहा है।

गौरतलब है कि सेंट्रल एडवाइजरी बोर्ड की २०१७ में आयोजित बैठक में भी केंद्र सरकार ने राज्यों से तबादला व ट्रेनिंग पॉलिसी को सही ढंग से लागू करने को कहा था, क्योंकि शहरी स्कूलों के शिक्षक तबादला लेना ही नहीं चाहते हैं। सरकारी स्कूलों में कई वर्षाें से सेवाएं दे रहे शिक्षकों को शैक्षिक योग्यता की जानकारी देनी होगी। शैक्षिक योग्यता में डिग्री या शिक्षक बनने की योग्यता वाले सर्टिफिकेट अपलोड करने होंगे। इसके अलावा आधार नंबर भी अपलोड होगा। इसके चलते फर्जी डिग्री के माध्यम से शिक्षक की नौकरी हासिल करने वालों पर गाज गिरेगी, क्योंकि डिग्री व आधार में नाम, पिता का नाम, उम्र आदि जानकारियों का मिलान किया जाएगा। राज्यों में तबादला नीति लागू न होने के चलते सरकारी स्कूलों के शिक्षक एक ही स्कूल में पूरा जीवन बिता देते हैं। इसके अलावा अधिकतर शिक्षक बिना ट्रेनिंग के ही नौकरी पूरी कर लेते हैं। इससे छात्रों का नुकसान होता है, क्योंकि शिक्षक को पढ़ाने की आधुनिक तकनीक के बारे में जानकारी ही नहीं होती है। इस प्रोफाइल में शिक्षक की शैक्षिक योग्यता, तबादला कितनी बार हुआ, ट्रेनिंग कितनी बार ली आदि की जानकारी होगी। इसके माध्यम से राज्य सरकार तबादला व ट्रेनिंग नीति लागू कर सकेंगे। इससे शहरों के अलावा ग्रामीण व पिछड़े इलाकों के स्कूलों को भी अच्छे शिक्षक मिलेंगे।

– ईएमएस