बाबरी विध्वंस की चार्जशीट में शामिल 13 नेताओं के नाम


बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में कई दिग्गज नेताओं के नाम शामिल हैं।
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नई दिल्ली। बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में कई दिग्गज नेताओं के नाम शामिल हैं। जिनमें बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी समेत १३ नेताओं के खिलाफ सीबीआई ने पूरक चार्जशीट दाखिल की थी। उसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सिर्फ टेक्नीकल ग्राउंड पर इन नेताओं को राहत नहीं दी जा सकती।

गौरतलब है कि इस मुकदमे की पहली जांच उत्तर प्रदेश पुलिस की सीआईडी और क्राइम ब्रांच ने की थी। सीआईडी ने फरवरी १९९३ में ८ अभियुक्तों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। इस मुकदमे के ट्रायल के लिए ललितपुर में विशेष अदालत स्थापित की गई थी। जिसे बाद में रायबरेली की विशेष अदालत में ट्रांसफर कर दिया था। इस घटना से जुड़े केस नंबर १९८ में पुलिस अधिकारी गंगा प्रसाद तिवारी ने 8 लोगों के खिलाफ राम कथा कुंज सभा मंच से मुस्लिम समुदाय के खिलाफ धार्मिक उन्माद भड़काने वाला भाषण देकर बाबरी मस्जिद गिरवाने का मुकदमा कायम कराया था। विध्वंस के बाद जिन दक्षिणपंथी नेताओं को नामजद अभियुक्त बनाया था, उनमें लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, अशोक सिंघल, गिरिराज किशोर, विनय कटियार, उमा भारती, विष्णु हरि डालमिया और साध्वी ऋतंभरा के नाम शामिल थे। उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा १५३ए, १५३बी, ५०५, १४७ और १४९ के तहत मुकदमे दायर थे। जिनकी सुनवाई रायबरेली की विशेष अदालत में कई साल चलती रही। इसके बाद कुछ मामले लखनऊ ट्रांसफर हुए तो कुछ सुप्रीम कोर्ट चले गए। केस नंबर १९७ में ६ दिसंबर १९९२ को विवादित स्थल को पूरी तरह से ध्वस्त किए जाने के बाद थाना राम जन्मभूमि, अयोध्या के प्रभारी पीएन शुक्ल ने शाम पांच बजकर पन्द्रह मिनट पर लाखों अज्ञात कार सेवकों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा कायम किया था। जिसमें बाबरी मस्जिद गिराने का षड्यंत्र, मारपीट और डकैती शामिल है। यह मुकदमा कई साल तक लखनऊ में चलता रहा, जिसमे अब तक लगभग १०० गवाह पेश हो चुके हैं। दरअसल, इस घटना से जुड़े मामलों में 49 दक्षिणपंथी नेताओं का जिक्र था। जिनमें से अब तक १२ लोगों की मौत हो चुकी है। इस मामले से जुड़े तकरीबन ५५ गवाह भी अब दुनिया में नहीं हैं। बाकी आरोपी जमानत पर बाहर आकर अपने मामलों की पैरवी कर रहे हैं। मार्च २०१५ में सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती और कल्याण सिंह को इस संबंध में नोटिस भी जारी किया था। भाजपा को सबसे ज्यादा फायदा राम मंदिर आंदोलन से ही मिला था। जिसका नेतृत्व उस वक्त लाल कृष्ण आडवाणी खुद कर रहे थे। ये बात दिगर है कि अब वह हाशिए पर हैं। उन्होंने सितंबर १९९० में इस आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए सोमनाथ से अयोध्या तक १० हजार किलोमीटर लंबी रथयात्रा की थी। वो जहां जहां गए वहां कई स्थानों पर सांप्रदायिक हिंसा हुई। कई लोग मारे गए। लेकिन बिहार में तत्कालीन लालू यादव सरकार ने आडवाणी को गिरफ्तार कर लिया था। सीबीआई की मूल चार्जशीट के मुताबिक आडवाणी अयोध्या में विवादित बाबरी मस्जिद गिराने की ‘साजिश’ के मुख्य सूत्रधार थे। आडवाणी ने ६ दिसंबर १९९२ को कहा था, ‘आज कारसेवा का आखिरी दिन है। कारसेवक आज आखिरी बार कारसेवा करेंगे। लालकृष्ण आडवाणी के बाद राम मंदिर आंदोलन में बीजेपी नेता जोशी का बड़ा नाम था, जोशी राम मंदिर आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे। ६ दिसंबर को जोशी भी मौके पर मौजूद थे। सीबीआई चार्जशीट के मुताबिक, मस्जिद का गुंबद गिरने पर उमा भारती, आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी से गले मिली थीं। मुरली मनोहर जोशी समेत कई बीजेपी नेताओं पर आरोप लगा कि २८ नवंबर को सुप्रीम कोर्ट से प्रतीकात्मक कारसेवा का फैसला हो जाने के बाद भी इन लोगों ने पूरे प्रदेश में सांप्रदायिकता से ओत-प्रोत भाषण दिए, जिनसे सांप्रदायिक जहर फैला था। मुरली मनोहर जोशी फिलवक्त कानपुर से बीजेपी के सांसद हैं। अमित शाह की अगुवाई वाली भाजपा में उन्हें भी आडवाणी की तरह राजनीतिक रूप से किनारे कर दिया है। राम मंदिर आंदोलन के दूसरे अहम किरदार थे दिवंगत वीएचपी अध्यक्ष अशोक सिंघल।

– क्या है मामला

सीबीआई चार्जशीट का कहना है कि २० नवंबर १९९२ को वे शिवसेना सुप्रीमो बाल ठाकरे से मिले और उन्हें कारसेवा में हिस्सा लेने का न्योता दिया। ४ दिसंबर १९९२ को बाल ठाकरे ने शिवसैनिकों को अयोध्या जाने का आदेश दिया। अशोक सिंघल ने कहा था कि ६ दिसंबर की कारसेवा में बाबरी की इमारत से मुगल कमांडर मीर बाकी का शिलालेख हटाया जाएगा, क्योंकि यही इकलौता चिह्न मस्जिद का प्रतीक है। दूसरे दिन ५ दिसंबर को अशोक सिंघल ने मीडिया से कहा- ‘मंदिर निर्माण में जो भी बाधा आएगी, हम उसे दूर कर देंगे। कारसेवा केवल भजन कीर्तन के लिए नहीं है, बल्कि मंदिर का निर्माण कार्य शुरू करने के लिए है। चार्जशीट में अशोक सिंघल पर आरोप है कि वे ६ दिसंबर को राम कथा कुंज पर बने मंच से नारा लगवा रहे थे कि ‘राम लला हम आए हैं, मंदिर वहीं बनाएंगे। एक धक्का और दो बाबरी मस्जिद तोड़ दो।’ आरोप है कि जब बाबरी मस्जिद ढहाई जा रही थी तो आरोपी प्रसन्न थे और मंच पर मिठाई बांटी जा रही थी। उत्तेजित कारसेवकों ने पहले बाबरी मस्जिद ढहाई। उसी दिन अयोध्या में मुसलमानों के कुछ घर तोड़े और जलाए गए है। अशोक सिंघल २०११ तक वीएचपी अध्यक्ष बने रहे। फिर स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दे दिया। उम्र के आखिरी पड़ाव तक वे सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे और विवादास्पद बयान देते रहे। लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी में भगवान राम की आत्मा प्रवेश कर गई है। १७ नवंबर २०१५ को उनका निधन हो गया था। वीएचपी ने राम मंदिर आंदोलन के लिए १ अक्टूबर १९८४ को अपनी एक आक्रामक शाखा की स्थापना की थी। जिसे ‘बजरंग दल’ का नाम दिया गया था। संघ प्रचारक और हिंदू जागरण मंच की स्थापना करने वाले विनय कटियार को इस संगठन का पहला अध्यक्ष बनाया गया था। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने जन्मभूमि आंदोलन को उग्र और हिंसक बनाया दिया था। विवादित ढांचा गिराए जाने से एक दिन पहले ५ दिसंबर को अयोध्या में विनय कटियार के घर पर ही एक बैठक हुई थी, जिसमें आडवाणी के अलावा शिव सेना नेता पवन पांडे भी मौजूद थे। इसी बैठक में विवादित ढांचा गिराने का आखिरी फैसला किया गया। सीबीआई चार्जशीट के मुताबिक, विनय कटियार ने ६ दिसंबर को अपने भाषण में कहा था, ‘हमारे बजरंगियों का उत्साह समुद्री तूफान से भी आगे बढ़ चुका है, जो एक नहीं तमाम बाबरी मस्जिदों को ध्वस्त कर देगा। बाबारी विध्वंस के बाद कटियार को राजनीतिक फायदा मिला था। उन्हें बीजेपी का राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया था। इसके बाद वो फैजाबाद लोकसभा सीट से तीन बार सांसद चुने गए। विनय कटियार अब बागी हो गए हैं। वह लगातार बीजेपी और पीएम मोदी के खिलाफ बयानबाजी के लिए चर्चाओं में रहते हैं।

यूपी से आने वाले बीजेपी के वरिष्ठ नेता कल्याण सिंह अब राजस्थान के राज्यपाल हैं। बाबरी विध्वंस के वक्त कल्याण सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। उन पर आरोप है कि उग्र कारसेवकों को उनकी पुलिस और प्रशासन ने जानबूझकर नहीं रोका। उल्टे उनकी मदद करती रही। उस वक्त कुछ तस्वीरें भी सामने आई थीं, जिनमें पुलिस वाले बावर्दी कारसेवकों के साथ नारेबाजी करते दिख रहे थे।

कल्याण सिंह उन १३ लोगों में शामिल हैं, जिन पर सीबीआई की मूल चार्जशीट में मस्जिद गिराने की ‘साजिश’ में शामिल होने का आरोप है। चार्जशीट के मुताबिक, १९९१ में ण्श् पद की शपथ लेने के बाद कल्याण सिंह ने मुरली मनोहर जोशी और दूसरे नेताओं के साथ अयोध्या जाकर शपथ ली थी कि विवादित जगह पर ही मंदिर बनेगा।

अक्टूबर १९९१ में उनकी सरकार ने बाबरी मस्जिद कॉम्प्लेक्स के पास २।७७ एकड़ जमीन का अधिग्रहण टूरिज्म प्रमोशन के नाम पर किया। जुलाई १९९२ में संघ परिवार ने प्रस्तावित राम मंदिर का शिलान्यास किया और बाबरी मस्जिद के इर्द-गिर्द खुदाई करके वहां सीमेंट-कंक्रीट की १० फुट मोटी परत भर दी गई। कल्याण सिंह सरकार ने इसे भजन करने का स्थान बताया और वीएचपी ने इसे राम मंदिर की बुनियाद घोषित कर दिया था।

आरोप है कि केंद्र सरकार ने १९५ कंपनी सेंट्रल मिलिट्री फ़ोर्स अयोध्या में राज्य पुलिस की मदद के लिए भेजी थी, लेकिन कल्याण सिंह सरकार ने उसका इस्तेमाल नहीं किया था। ५ दिसंबर को यूपी के प्रमुख सचिव (गृह) ने केंद्रीय बल का प्रयोग करने का सुझाव दिया, लेकिन कल्याण इस पर भी राजी नहीं हुए थे। उन पर साजिश में शामिल होने का आरोप है। ६ दिसंबर की शाम को ही घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।

घटना के बाद कल्याण सिंह ने विवादित भाषण दिया था। जिसमें उन्होंने कहा था- ‘कोर्ट में केस करना है तो मेरे खिलाफ करो, जांच आयोग बैठाना है तो मेरे खिलाफ बैठाओ। किसी को दंड देना है तो मुझे दो। दोपहर १ बजे केंद्रीय गृहमंत्री शंकरराव चह्वाण का मेरे पास फोन आया। मैंने उनसे कहा कि ये बात रिकॉर्ड कर लो चह्वाण साहब कि मैं गोली नहीं चलाऊंगा, गोली नहीं चलाऊंगा।’

राम जन्मभूमि आंदोलन के बड़े नामों में मौजूदा केंद्रीय पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री उमा भारती का नाम भी शामिल है। १९८४ में भागवतकथा वाचक उमा भारती पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ी लेकिन हार गईं। १९८९ और फिर १९९१ में वे मध्य प्रदेश की खजुराहो सीट से लोकसभा चुनाव जीती। राम जन्मभूमि आंदोलन में उनकी भूमिका से उनका सियासी कद बढ़ गया। उमा भारती के उग्र भाषणों से आंदोलन को गति मिली और महिलाएं बड़ी संख्या में कारसेवा के लिए अयोध्या जा पहुंचीं। ६ दिसंबर को ढांचा गिराए जाने के वक्त अन्य बीजेपी और वीएचपी नेताओं के साथ वो मौके पर मौजूद थीं। लिब्रहान आयोग ने बाबरी विध्वंस में उनकी भूमिका दोषपूर्ण पाई थी। भारती पर भीड़ को उकसाने का आरोप है। उन्हें इसका कोई अफसोस नहीं है और वह ढांचा गिराए जाने की नैतिक जिम्मेदारी लेने को भी तैयार रही।

बाबरी ढांचा गिराए जाने के बाद उमा भारती लगातार सांसद और अटल बिहारी सरकार में मंत्री रहीं। फिर उन्हीं के नेतृत्व में पार्टी ने दिग्विजय सिंह के १० साल के शासन को खत्म कर एमपी में बीजेपी की सत्ता वापसी की। २००४ में अनुशासनहीनता के नाम पर उन्हें पार्टी से बर्खास्त कर दिया गया। उन्होंने नई पार्टी बना ली। लेकिन ७ जून २०११ को फिर उन्हें बीजेपी में शामिल कर लिया गया। अभी वे यूपी की झांसी सीट से सांसद और मोदी सरकार में मंत्री हैं। बाबरी ध्वंस के बाद साध्वी ऋतंभरा राजनीतिक रूप से लो-प्रोफाइल हो गई थी। २००२ में प्रदेश की भाजपा सरकार ने आश्रम के लिए उन्हें १७ हेक्टेयर जमीन ९९ साल के लिए एक रुपए सालाना की फीस पर आवंटित कर दी। उस वक्त इस जमीन की कीमत २० करोड़ रुपए के आसपास थी। उनके आश्रम ‘वात्सल्य ग्राम’ ने कई अनाथ बच्चियों को आश्रय दिया। उनकी पढ़ाई-लिखाई का खर्च भी वही उठाती है। लेकिन गाहे बगाहे उनके उग्र बयान चर्चाओं में आ जाते हैं।

– ईएमएस