मोदी सरकार ने दी सवर्णों को सरकारी नौकरियों 10 फीसदी आरक्षण की सौगात


सोमवार को पीएम मोदी की अध्‍यक्षता में कैबिनेट की हुई बैठक में सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण देने के फैसले पर मुहर लगाई गई।
Photo/Twitter
इस घोषणा से भाजपा को लोस चुनाव में मिल सकता है सियासी लाभ

नई दिल्ली। सवर्णों की नाराजगी को दूर करते हुए केंद्र की मोदी सरकार ने लोकसभा चुनाव से पूर्व विपक्ष के नहले पर दहला खेला है। मोदी सरकार ने फैसला लिया है कि वह सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण देगी। सोमवार को पीएम मोदी की अध्‍यक्षता में कैबिनेट की हुई बैठक में सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण देने के फैसले पर मुहर लगाई गई। कैबिनेट ने फैसला लिया है कि यह आरक्षण आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को दिया जाएगा। आरक्षण का लाभ सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षा में मिलेगा। बताया जा रहा है कि आरक्षण का फॉर्मूला 50 फीसदी प्लस 10 फीसदी का होगा। सूत्रों का कहना है कि लोकसभा में मंगलवार को मोदी सरकार आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों को आरक्षण देने संबंधी बिल पेश कर सकती है। सूत्रों का यह भी कहना है कि सरकार संविधान में संशोधन के लिए बिल ला सकती है। इसके तहत आर्थिक आधार पर सभी धर्मों के सवर्णों को दिया जाएगा आरक्षण। इसके लिए संविधान के अनुच्‍छेद 15 और 16 में संशोधन होगा। केंद्र सरकार के इस फैसले पर वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इसे कहते हैं 56 इंच का सीना।

सरकार के इस बड़े फैसले का भारतीय जनता पार्टी ने स्वागत किया है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि गरीब सवर्णों को आरक्षण मिलना चाहिए। पीएम मोदी की नीति है कि सबका साथ सबका विकास। सरकार ने सवर्णों को उनका हक दिया है। पीएम मोदी देश की जनता के लिए काम कर रहे हैं। मालूम हो कि करीब दो महीने बाद लोकसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में सवर्णों को आरक्षण देने का फैसला भाजपा के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है। हाल ही में संपन्न हुए मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों में भाजपा की हार हुई थी। इस हार के पीछे सवर्णों की नाराजगी को अहम वजह बताया जा रहा है।

पिछले लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में भाजपा को 80 में से 73 सीटें मिली थीं। इस बार भाजपा को चुनौती देने के लिए समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने हाथ मिला लिया है। इसके बाद माना जा रहा था कि भाजपा इस गठबंधन से निपटने के लिए कोई बड़ा कदम उठा सकती है। सवर्णों को आरक्षण देने के फैसले को सरकार का मास्टस्ट्रोक माना जा रहा है।

दरअसल सियासी विश्‍लेषकों के मुताबिक सपा-बसपा ने यूपी में अपने चुनावी गठबंधन में कांग्रेस को रणनीति के तहत शामिल नहीं करने का फैसला किया है। उसके पीछे बड़ी वजह मानी जा रही है कि भाजपा के सवर्ण तबके में बंटवारे के लिहाज से कांग्रेस और सपा-बसपा अलग-अलग चुनाव लड़ने जा रहे हैं ताकि सवर्णों का वोट भाजपा और कांग्रेस में विभाजित हो जाए। लेकिन लंबे समय से गरीब सवर्णों के लिए आरक्षण की मांग के चलते इस घोषणा से भाजपा को सियासी लाभ मिल सकता है।

इन सभी को मिलेगा लाभ- जिनकी सालाना आय 8 लाख से कम हो। जिनके पास 5 लाख से कम की खेती की जमीन हो। जिनके पास 1000 स्क्वायर फीट से कम का घर हो। जिनके पास निगम की 109 गज से कम अधिसूचित जमीन हो। जिनके पास 209 गज से कम की निगम की गैर-अधिसूचित जमीन हो।

गौरतलब है कि मोदी सरकार ये आरक्षण आर्थिक आधार पर ला रही है, जिसकी अभी संविधान में व्यवस्था नहीं है। संविधान में जाति के आधार पर आरक्षण की बात कही गई है, ऐसे में सरकार को इसको लागू करने के लिए संविधान में संशोधन करना होगा। सरकार के इस फैसले को लोकसभा चुनाव से जोड़ते हुए देखा जा रहा है। सरकार इसके लिए जल्द ही संविधान में बदलाव करेगी। इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 15 और अनुच्छेद 16 में बदलाव किया जाएगा। दोनों अनुच्छेद में बदलाव कर आर्थिक आधार पर आरक्षण देने का रास्ता साफ हो जाएगा।

ज्ञात हो कि पिछले साल जब सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट में बदलाव करने का आदेश दिया था, तब देशभर में दलितों ने काफी प्रदर्शन किया था। जिसको देखते हुए केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का फैसला बदल दिया था। माना जा रहा था कि मोदी सरकार के इस फैसले से सवर्ण काफी नाराज हो गए हैं। दलितों के बंद के बाद सवर्णों ने भी भारत बंद का आह्वान किया था। केंद्र सरकार के इस फैसले के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं।

कांग्रेस के अमी याज्ञनिक का कहना है कि इस प्रकार के आरक्षण पर काफी तकनीकि दिक्कतें हैं, लोकसभा चुनाव से पहले इस प्रकार आरक्षण देने का क्या मकसद है ये भी देखना होगा। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर बिल आने और पास होने में काफी समय लग सकता है। सरकार इस मुद्दे को लेकर गंभीर नहीं है। केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि सरकार का ये फैसला काफी अच्छा है, इससे समाज के एक बड़े तबके को लाभ होगा। उन्होंने कहा कि सवर्णों में भी कई ऐसे लोग हैं जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं।

– ईएमएस