बैकफुट पर जाना रोकने के लिए मोदी सरकार किसानों के लिए कर सकती है बड़ा ऐलान


लंबे विचार मंथन के बाद मोदी सरकार किसानों के लिए बड़ा ऐलान की तैयारी कर रही है।
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नई दिल्ली। तीन राज्यों में कांग्रेस के हाथों पराजय का सामना करने वाली भाजपा ने अब वैकल्पिक रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। सूत्रों के अनुसार लंबे विचार मंथन के बाद मोदी सरकार किसानों के लिए बड़ा ऐलान की तैयारी कर रही है। हाल में हुए विधानसभा चुनाव के विश्लेषण से पता चलता है कि भाजपा को ग्रामीण मतदाताओं ने विशेष रूप से नकारा है। इसी वजह से भाजपा ने योजना बनाई है कि अब वह ग्रामीणों से जुड़े मुद्दों पर विशेष रूप से ध्यान देगी। सूत्रों ने बताया कि केंद्र सरकार किसानों की कर्जमाफी के लिए बड़ा फैसला कर सकते हैं।

सूत्रों के मुताबिक मोदी सरकार एक बार फिर चुनाव में हार के लिए ग्रामीण इलाकों को बड़ी वजह मानते हुए लोकसभा चुनाव से पहले किसानों को खुश करने के लिए करोड़ों रुपये के कर्ज को माफ करने के लिए सरकारी तिजोरी का मुंह खोल सकती है। दरअसल 2014 लोकसभा चुनाव के बाद से किसान कर्जमाफी राजनीति में चुनाव जीतने का सबसे अहम जरिया बन चुका है। देश के ग्रामीण इलाकों में लहर के साथ सत्ता पर बैठने वाली भाजपा सरकार ने कर्जमाफी का पहला टेस्ट उत्तर प्रदेश चुनाव में किया था।
उत्तर प्रदेश चुनाव के प्रचार में जब कांग्रेस ने राहुल के नेतृत्व में किसान यात्रा शुरू की तब चुनाव से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बाजी पलटने के लिए किसान कर्जमाफी का ऐलान कर दिया। इसका असर चुनाव नतीजों पर दिखा और यूपी में पूर्ण बहुमत वाली भाजपा सरकार बन गई।

वादे के मुताबिक उत्तर प्रदेश में कमान संभालते हुए मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने पहली कैबिनेट बैठक में पीएम का वादा पूरा किया और किसानों के लिए 36 हजार करोड़ रुपये की आंशिक कर्जमाफी का ऐलान कर दिया। इस ऐलान के तुरंत बाद देश के अन्य राज्यों ने भी किसानों के लिए कर्जमाफी की मांग तेज कर दी। पूरे देश से किसान कर्जमाफी की मांग उठते ही केन्द्रीय रिजर्व बैंक और भारतीय स्टेट बैंक के प्रमुखों ने इस मांग को गलत ठहराते हुए दावा किया कि किसानों की कर्जमाफी से बैंकिंग व्यवस्था को चोट पहुंचती है, लिहाजा केन्द्र सरकार को कर्जमाफी के इतर किसानों को फायदा पहुंचाने का काम करना होगा।

किसान कर्ज माफी का विरोध करने वालों में रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल समेत डिप्टी गवर्नर एस.एस. मूंदड़ा भी शामिल थे। रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन भी कर्जमाफी के जरिए राजनीति सफल करने को ‘नैतिक रूप से गलत’ मानते थे। देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई की 2017 में चेयरपर्सन रहीं अरुंधति भट्टाचार्य ने भी किसान कर्जमाफी पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद भी किसानों की कर्जमाफी चुनावी जीत का अनुभूत नुस्खा बन गया है।

– ईएमएस