राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा किरदार निभाने की तैयारी में जुटी ममता


नोटबंदी को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर आलोचना की, जिसके बाद ममता विपक्ष के गठबंधन की अग्रणी नेता बन गईं।
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कोलकाता । पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए बीता साल 2018 मिला-जुला रहा है। एक ओर देश की राजनीति में उनकी सक्रियता बढ़ी तो दूसरी ओर उनके अपने राज्य में उनकी चमक भाजपा के उत्थान के बाद थोड़ी फीकी पड़ी है। अब ममता अगले कुछ महीनों में होने वाले लोकसभा चुनाव में किंगमेकर की भूमिका निभाने पर लग गई है। 2014 में भाजपा की जीत के बाद जहां ज्यादातर क्षेत्रीय पार्टियां हाशिए पर आ गई थीं, वहीं ममता ने इस ट्रेंड को पीछे छोड़ते हुए अपनी सीमाओं में एक कद्दावर नेता के रूप में उभरीं, जिसने भाजपा की नीतियों का लगातार विरोध किया। उन्होंने नोटबंदी को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर आलोचना की, जिसके बाद ममता विपक्ष के गठबंधन की अग्रणी नेता बन गईं।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि सन 2019 में अगर भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए और कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूपीए बहुमत लाने से चूक गया, तो ममता किंगमेकर की भूमिका निभा सकती हैं। कलकत्ता रिसर्च ग्रुप के प्रोफेसर रणबीर समद्दर का मानना है कि आगामी 2019 लोकसभा चुनाव क्षेत्रीय पार्टियों के लिए प्राइम टाइम साबित हो सकता है। इस बार 2014 जैसे एकतरफा परिणामों की बेहद अल्प गुंजाइश की तरफ इशारा करते हुए उन्होंने कहा ममता मानती हैं कि वह आने वाले चुनाव में तुरुप का इक्का साबित हो सकती हैं।
2018 पर नजर डालें तो ममता बनर्जी खुद को राष्ट्रीय राजनीति में काफी कुछ स्थापित कर चुकी हैं। विपक्षी नेताओं से मुलाकात के लिए दिल्ली दौरे से लेकर, कर्नाटक में जेडी(एस) नेता एचडी कुमारस्वामी को समर्थन देकर, एसपी अध्यक्ष अखिलेश यादव को यूपी उपचुनाव में अपनी कड़ी प्रतिद्वंद्वी बीएसपी मुखिया मायावती के साथ आने की सलाह देकर ममता ने विपक्षी एकता में महत्वपूर्ण किरदार निभाया है। वह ममता ही थीं जिन्होंने कर्नाटक में भाजपा के बहुमत का आंकड़ा न छू पाने पर कांग्रेस के साथ संयुक्त रूप से हिस्सेदारी के लिए जेडी(एस) को आश्वस्त किया था। इसके बाद ही किंगमेकर बनने की इच्छा रखने वाले एन चंद्रबाबू नायडू और के चंद्रशेखर राव (केसीआर) ने उनसे समर्थन प्राप्त करने की कोशिशें तेज कर दीं हैं।

– ईएमएस