अमेरिका के जवाब में चीन ने बनाया ‘मदर ऑफ ऑल बम’


दुनिया के प्रभुता संपन्न राष्ट्र भले ही निशस्त्रीकरण का राग अलापते हो पर वे परमाण हथियार निर्माण में पीछे नहीं है।
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नई दिल्ली। दुनिया के प्रभुता संपन्न राष्ट्र भले ही निशस्त्रीकरण का राग अलापते हो पर वे परमाण हथियार निर्माण में पीछे नहीं है। अमेरिका के ‘मदर ऑफ ऑल बम’ और रूस के ‘फादर ऑफ ऑल बम’ बनाने के दावे के बाद चीन ने भी ‘मदर ऑफ ऑल बम’ बनाने का दावा किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन का दावा है कि उसके द्वारा तैयार किए गए सबसे शक्तिशाली गैर-परमाणु बम ‘मदर ऑफ ऑल बम’ अमेरिका के ‘मदर ऑफ ऑल बम’ का जवाब है।

जानकारी के मुताबिक संस्करण के रूप में तैयार इस बम की विनाशकारी क्षमता के कारण इसका नाम ‘मदर ऑफ ऑल बम’ दिया गया है, दावा है यह परमाणु हथियारों के बाद दूसरा सबसे ज्यादा घातक हथियार है। जानकारी के मुताबिक इससे होने वाली तबाही लगभग परमाणु बम जैसी ही होगी। इस बेहद घातक बम को एच-6के एयरक्राफ्ट से गिराया गया, जिसके कारण एक विशाल विस्फोट हुआ। चीन ने नॉर्थ इंडस्ट्रीज ग्रुप कॉर्पोरेशन लिमिटेड की वेबसाइट पर दिसंबर के अंत में एक वीडियो जारी कर इसकी सूचना दी। समाचार के मुताबिक यह पहली बार है जब सार्वजनिक रूप से किसी नए बम की विनाशकारी शक्तियों को दिखाया गया हो।

बता दें कि अमेरिका ने अफगानिस्तान में आईएसआईएस के खिलाफ पहली बार दुनिया के सबसे शक्तिशाली गैर-परमाणु बम जीबीयू-43 का इस्तेमाल किया था। इस बम को ‘मदर ऑफ ऑल बम’ भी कहा गया। यह इतना घातक है कि इस बम के गिराए जाने पर सवा 3 किलोमीटर के दायरे में आने वाली हर चीज तबाह हो सकती है। वहीं, अमेरिका के बाद रूस ने भी दुनिया का सबसे शक्तिशाली गैर-परमाणु बम बनाने का दावा करते हुए उसे ‘फादर ऑफ ऑल बम’ नाम दिया। रूस का दावा था कि यह बम अमेरिका के मदर ऑफ ऑल बम से करीब चार गुणा ज्यादा खतरनाक है। चीन द्वारा तैयार किया गया यह बम अमेरिकी ‘मदर ऑफ ऑल बम’ के मुकाबले आकार में छोटा और हल्का है। जानकारी के मुताबिक इसकी लंबाई 5 से 6 मीटर है। बाधाओं से घिरे जंगली इलाकों में हेलिकॉप्टर से नीचे उतरने वाले सैनिकों के लिए एक लैंडिंग जोन बनाने के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

– ईएमएस