गंगा को गंदा करने पर होगी जेल, सरकार ने बनाया नया कानून


सरकारी दस्तावेजों से संबंधित लोगों का कहना है कि इनके पास उन लोगों को गिरफ्तार करने का अधिकार होगा जो नदी को प्रदूषित करेंगे।

नई दिल्ली। गंगा नदी को केंद्र सरकार साफ करने की पूरी कोशिश कर रही है। सरकार ने गंगा विधेयक २०१८ प्रस्तावित किया है। जिसमें गंगा प्रोटेक्शन कॉप्र्स की नियुक्ति का सुझाव दिया गया है। सरकारी दस्तावेजों और मामले से संबंधित लोगों का कहना है कि इनके पास उन लोगों को गिरफ्तार करने का अधिकार होगा जो नदी को प्रदूषित करेंगे। यह नदी को साफ रखने और कायाकल्प करने में मदद करेंगे।

राष्ट्रीय गंगा काउंसिल की मांग पर इन पुलिसवालों का खर्च गृह मंत्रालय उठाएगा। काउंसिल ५ विशेषज्ञों की टीम है जिनके पास किसी उद्योग, बांधों और अन्य ढांचों के निर्माण को बंद करने या उनका विनियमन करने का अधिकार है जिनसे कि नदी के सतत प्रवाह पर असर पड़ता हो। साथ ही वह उस गतिविधि पर रोक लगा सकते हैं जिससे कि नदी प्रदूषित होती है। इस विधेयक का उद्देश्य गंगा का जीर्णोद्धार करके उसका प्राचीन स्वरुप लौटाकर उसके निर्बाध प्रवाह को सुनिश्चित करना है।

जल संसाधन मंत्रालय के सचिव यूपी सिंह ने पुष्टि की कि मसौदे को मंत्रालयों के पास भेज दिया गया है। उन्होंने कहा कि सभी मंत्रियों द्वारा देखे जाने के बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा। विधेयक के अनुसार पुलिसवालों के पास अपराधियों को गिरफ्तार करने, हिरासत में लेने, उसे पास के पुलिस थाने में ले जाने का अधिकार होगा। गंगा अधिनियम के तहत दंडनीय अपराधों और जुर्माना की लंबी सूची है जिसमें घाट को खराब करना या सीढ़ियों को नुकसान पहुंचाना या नदी में कोई अपमानजनक चीज फेंकना शामिल है।

दूसरे अपराधों में पत्थर खनन, अनुमति के बिना वाणिज्यिक मछली पकड़ना, पहाड़ी ढलानों या संवेदनवशील क्षेत्रों में वनों की कटाई करना, ट्यूबवेल या उद्योग की जरुरतों की संगठित खपत के लिए भूजल निकालना सहित दूसरे शामिल हैं। यह सभी अपराध २ साल तक कारावास या ५०,००० रु तक के जुर्माना के साथ दंडनीय हैं। यह अपराध और जुर्माना राष्ट्रीय नदी गंगा विधेयक २०१८ के अंतर्गत आते हैं।

विधेयक ने कहा कि केंद्र सरकार का गंगा के प्रबंधन, विनियमन और विकास पर नियंत्रण रहेगा और इसे राष्ट्रीय नदी का दर्जा दिया क्योंकि गंगा नदी का खास महत्व है। भौगोलिक, ऐतिहासिक, सामाजिक-सांस्कृतिक और आर्थिक और विश्वास के कारणों की वजह से इसे राष्ट्रीय नदी का दर्जा दिया जाना चाहिए। विधेयक की धारा ५४ के अनुसार यदि कोई कंपनी अपराध करती है तो, अपराध के समय कंपनी में उस समय मौजूद रहे हर शख्स को दोषी माना जाएगा।

– ईएमएस