मादक पदार्थों की बिक्री से मिले धन से की जा रही आतंकियों को फंडिंग


मादक पदार्थों की तस्करी से आने वाला पैसा न सिर्फ स्थानीय माफिया को संचालित करता है, बल्कि आतंकवाद का भी पोषण करता है।
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नई दिल्ली । मादक पदार्थों की तस्करी से आने वाला पैसा न सिर्फ स्थानीय माफिया को संचालित करता है, बल्कि आतंकवाद का भी पोषण करता है। गिरफ्त में आए कुछ मादक पदार्थ तस्करों ने खुलासा किया है कि हेरोइन का काला कारोबार अफगानिस्तान में बैठे बड़े तस्करों के इशारे पर संचालित हो रहा है। तस्कर सरगना अपने मजबूत नेटवर्क के जरिए अफगानिस्तान से हेरोइन पाकिस्तान भेजते हैं, जहां से जम्मू-कश्मीर के रास्ते भारत में प्रवेश करती है, इसके बाद इसे देश के दूसरे हिस्सों में भेजा जाता है। ऐसे संकेत हैं कि मादक पदार्थों की बिक्री से होने वाली आय का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों में किया जा रहा है।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया इन दिनों सीमा पार से पैसे के रूप में मादक पदार्थों का लेनदेन आतंकियों की फंडिंग का बड़ा जरिया बन गया है। पंजाब और कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए आतंकी संगठनों के माध्यम से मादक पदार्थ उपलब्ध कराए जाते हैं। जब मादक पदार्थ तस्करों के पास पहुंचता है, तो तस्करों द्वारा इसकी पेमेंट कश्मीर में मौजूद आतंकी संगठनों और अलगाववादियों को हवाला आदि के माध्यम से की जाती है।

फंडिंग का चौथा जरिया इंटरनेट ट्रांजैक्शन हो गया है। फंडिंग को लेकर कश्मीर में कई लोगों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। इसके अलावा नेपाल, पाकिस्तान, बांग्लादेश और बर्मा में भी नशे के कारोबारियों की सक्रियता बढऩे के कारण भारत में ड्रग्स तस्करी बढ़ती जा रही है।
तस्कर दिल्ली-एनसीआर को नशे का हब मानते हैं। खरीदार से सौदा तय हो जाने के बाद कोरियर सेवा के माध्यम से प्रतिबंधित ड्रग्स को सीधे ग्राहक को उसके घर पर उपलब्ध कराया जा रहा है। पेमेंट के लिए केडिट कार्ड अथवा इंटरनेशनल ऑनलाइन मनी ट्रांसफर सर्विस का प्रयोग होता है। ज्यादातर मामलों में डिलिवरी के बाद ही भुगतान किया जाता है, जबकि एक बार ग्राहक की संतुष्टि होने पर एडवांस में भी भुगतान कर दिया जाता है।

– ईएमएस