दिल्ली-एनसीआर में बार-बार भूंकप के झटके बड़ा संकेत


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नई दिल्ली। पूरे दिल्ली-एनसीआर सहित भारत के कई राज्यों में पिछले एक सप्ताह के दौरान दर्जनभर बार भूकंप के झटके लग चुके हैं। रविवार शाम को दिल्ली-एनसीआर में पहला झटका लगा, इसके बाद फिर बुधवार सुबह जम्मू-कश्मीर और हरियाणा में भूकंप के झटके महसूस किए गए। इसके बाद उत्तर के राज्य जम्मू-कश्मीर में सुबह सवा पांच बजे भूकंप के झटके लगे। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 4.6 मापी गई।

सुबह 5:43 बजे हरियाणा में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए। 3.1 तीव्रता वाले इस भूकंप का केंद्र झज्जर था। इस बीच बिहार, पश्चिम बंगाल सहित उत्तर-पूर्व के कई राज्यों में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए।

बार-बार भूकंप बड़ा संकेत

वैज्ञानिकों की मानें तो पिछले एक सप्ताह के दौरान भूकंप के लगातार झटके काफी बड़ा संकेत दे रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली सिस्मिक जोन 4 में है। यहां 6 से अधिक तीव्रता का भूकंप तबाही मचा सकता है। दिल्ली चारों तरफ भूगर्भीय फाल्ट (भ्रंश) से घिरी हुई है, इसकारण बड़ा भूकंप आने से यहां बहुत ज्यादा नुकसान हो सकता है। एक शोध में 1200 बोरवेल और फ्लाईओवर का डेटा लेकर अध्ययन किया गया है। इसमें पाया गया है कि रोहिणी,पीतमपुरा,जहांगीरपुरी,राजौरी गार्डन,पंजाबी बाग,निर्माण विहार,सीलमपुर,मयूर विहार,लक्ष्मी नगर, मुखर्जी नगर, कश्मीरी गेट, तिमारपुर, नेहरू विहार, नई दिल्ली का पूरा इलाका बड़े भूकंप नहीं सह सकता।

भूकंप का विज्ञान और संभावनाएं

2015 में आई एक रिपोर्ट में भारत के एक मशहूर भूकंप जानकार और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण एनडीएमए के सदस्य डॉ.हर्ष गुप्ता ने बताया था कि भारत के 344 शहर और नगर भूकंप के लिहाज से हाई रिस्क जोन-5 में रहते हैं। हर्ष गुप्ता के मुताबिक, अगर यहां 9 रिक्टर स्केल का कोई भूकंप आ जाए तो यह हिरोशिमा पर गिरे 27 हजार बमों के बराबर होगा। यही नहीं, इसके बाद सालों तक ऑफ्टर शॉक भी आते रहने वाले है। इंडियन प्लेट हिमालय से लेकर अंटार्कटिक तक फैली है। यह पाकिस्तान बार्डर से सिर्फ टच करती है। यह हिमालय के दक्षिण में है,जबकि यूरेशियन प्लेट हिमालय के उत्तर में है। इंडियन प्लेट उत्तर-पूर्व दिशा में, यूरेशियन प्लेट जिसमें चीन आदि बसे हैं कि तरफ बढ़ रही है। इसके बाद यदि ये प्लेटें टकराती हैं तो भूकंप का केंद्र भारत में होगा। भूंकप के खतरे के हिसाब से भारत को चार जोन में विभाजित किया गया है। जोन दो-दक्षिण भारतीय क्षेत्र जो सबसे कम खतरे वाले हैं। जोन तीन-मध्य भारत, जोन चार-दिल्ली समेत उत्तर भारत का तराई क्षेत्र, जोन पांच-हिमालय क्षेत्र और पूर्वोत्तर क्षेत्र तथा कच्छ। जोन पांच सबसे ज्यादा खतरे वाले हैं।

वैज्ञानिकों ने पहले ही अंदेशा जता दिया था कि पृथ्वी में हो रहे बदलाव के चलते अगले कुछ सालों में भयानक भूकंप आ सकते हैं। वैज्ञानिकों की मानें तो दिल्ली हिमालय के निकट है जो भारत और यूरेशिया जैसी टेक्टॉनिक प्लेटों के मिलने से बना है। इसकारण धरती के भीतर की इन प्लेटों में होने वाली हलचल के चलते यूपी के कानपुर और लखनऊ के साथ दिल्ली के तकरीबन सभी इलाकों में भूकंप का खतरा सबसे ज्यादा है।