नायडू-राहुल में डील एनडीए का पूर्व संयोजक अब बढ़ाएगा यूपीए का कुनबा


बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए की कमान संभाल चुके दो दिग्गज नेता मात देने के लिए कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए का कुनबा बढ़ाने में जुटे हैं।
(Photo: IANS/PIB)

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले एनडीए को मात देने के लिए कांग्रेस विपक्षी दलों को एकजुट कर महागठबंधन बनाने की कोशिश कर रही है। हालांकि इस मुहिम में अभी तक कांग्रेस को बहुत ज्यादा कामयाबी नहीं मिल सकी है। यही वजह है कि कभी बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए की कमान संभाल चुके दो दिग्गज नेता गुरुवार को उसी को मात देने के लिए कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए का कुनबा बढ़ाने में जुटे हैं।

पीएम मोदी विरोधी आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू इन दिनों कांग्रेस के साथ दुश्मनी भुलाकर हाथ मिलाकर विपक्षी दलों को एकजुट कर महागठबंधन बनाने की कवायद में लगे हैं। इस कड़ी में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, एनसीपी प्रमुख शरद पवार, नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारुक अब्दुल्ला, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और मुलायम सिंह यादव के साथ मुलाकात की है।

बात दे कि चंद्रबाबू नायडू की हफ्ते भर में दूसरी दिल्ली यात्रा की। इससे पहले बीते शनिवार को नायडू ने दिल्ली पहुंचकर बसपा प्रमुख मायावती, शरद यादव और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सहित अन्य नेताओं के साथ मुलाकात कर महागठबंधन के लिए मंथन किया था। हालांकि नायडू एक दौर में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए का हिस्सा ही नहीं बल्कि सहयोगी दलों को सहेजकर रखने का जिम्मा भी संभाल रहे थे। पूर्व पीएम वाजयेपी के दौर में एनडीए के संयोजक रहते हुए नायडू के जिम्मे मायावती, ममता और जयललिता को साथ जोड़कर रखने की जिम्मेदारी थी।

बीजेपी ने 2013 में नरेंद्र मोदी को जब पीएम पद का उम्मीदवार घोषित किया, तो एनडीए से जेडीयू अलग हो गई। इसके बाद शरद यादव को एनडीए का संयोजक पद भी छोड़ना पड़ा, जिसके बाद फिर नायडू को इसका जिम्मा सौंपा गया था। नायडू 2013 से 2017 तक एनडीए के संयोजक रहे, लेकिन आंध्रप्रदेश के लिए विशेष दर्जे की मांग को लेकर टीडीपी ने एनडीए से अलग हो गई है। अब नायडू उसी एनडीए को मात देने की कवायद में जुट गए हैं। सपा से लेकर ममता बनर्जी और शरद पवार सहित नीतीश कुमार से बेहतर रिश्ते हैं। जिस तरह से नायडू इन दिनों लगे हैं देखना है कि इसमें कहां तक कामयाबी पाते हैं।

दरअसल बसपा ने पांच राज्यों के हो रहे विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ गठबंधन न करने का फैसला किया है। हालांकि कांग्रेस नेताओं को उम्मीद है कि 2019 के चुनाव में बसपा उनके साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी। वहीं, आम आदमी पार्टी भी कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं करने का फैसला किया है। इसके बाद नायडू इन दोनों नेताओं को साथ लाने में कितना सफल रहते हैं? नायडू अकेले ही नहीं शरद यादव भी विपक्ष को एकजुट करने में लगे हैं। शरद यादव भी एनडीए के संयोजक रह चुके हैं। वे देश भर देश बचाओ संविधान बचाओ कार्यक्रम करके बीजेपी के खिलाफ माहौल बनाने में जुटे हैं। यादव इस कार्यक्रम में विपक्ष के तमाम नेताओं को एक साथ मंच पर ला रहे हैं।

– ईएमएस