अयोध्या केस: जनवरी 2019 तक टली अयोध्या जमीन मामले की सुनवाई


अयोध्या में विवादित ढांचा मामले पर मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय नई पीठ ने मामले को 29 जनवरी तक टाल दिया।

नई बेंच कर सकती है सुनवाई

नई दिल्ली (ईएमएस)। अयोध्या में विवादित ढांचा मामले पर मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय नई पीठ ने सोमवार को सुनवाई की। पीठ में जस्टिस संजय किशन कौल और केएम जोसेफ शामिल थे।

न्यायालय ने इस मामले को अगले साल जनवरी तक के लिए टाल दिया है। हालांकि माना जा रहा था कि इस सुनवाई के बाद भविष्य की रूपरेखा तैयार की जाएगी।

पक्षकारों के एक वकील विष्णु जैन का मानना था कि पीठ मामले में उचित पीठ का गठन कर सकती है। या फिर हो सकता है कि तीन सदस्यीय पीठ ही मामले की नियमित रूप से सुनवाई करे। इसपर अभी फैसला होना बाकी है।

गौरतलब है कि 2010 से यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, लेकिन भूमि विवाद के मसले पर अब तक नियमित सुनवाई शुरू नहीं हो सकी है। पहले तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ मामले की सुनवाई कर रही थी। सुनवाई की शुरुआत में ही मुस्लिम पक्षकारों ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला 1994 में इस्माइल फारूखी मामले में सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी से प्रभावित है, जिसमें कहा गया था कि मस्जिद इस्लाम का अभिन्न अंग नहीं है। उन्होंनेे पहले इस टिप्पणी को पुनर्विचार के लिए संविधान पीठ को भेजने की मांग की।

तत्कालीन सीजेआई दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और एस. अब्दुल नजीर की पीठ ने 27 सितंबर को बहुमत (2:1) से लिए फैसले में मसले को संविधान पीठ को भेजने से इनकार कर दिया। साथ ही साफ किया कि मामले का निपटारा भूमि विवाद के तौर पर किया जाएगा।

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