एंटीबायोटिक दवाएं हो रही बेअसर


शरीर में जो जीवाणु मौजूद हैं, वे इन दवाओं के विरुद्ध अपना प्रतिरोधी तंत्र विकसित करने में सफल हो रहे हैं। दवाएं रोग पर बेअसर भी साबित हो रही है।
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ये दवाएं शरीर में एलर्जी पैदा करने का बन रही सबब

नई दिल्ली। तमाम बीमारियों का रामबाण इलाज आज भी एंटीबायोटिक दवाओं से संभव हो पा रहा है, लेकिन कभी-कभी ये दवाएं शरीर में एलर्जी व अन्य नई बीमारियों को पैदा करने का सबब बन जाती हैं। शरीर में जो जीवाणु व विषाणु मौजूद हैं, वे इन दवाओं के विरुद्ध अपना प्रतिरोधी तंत्र विकसित करने में सफल हो रहे हैं। नतीजतन ये दवाएं रोग पर बेअसर भी साबित हो रही है। इसीलिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपनी एक रिपोर्ट में एंटीबायोटिक दवाओं के विरूद्ध पैदा हो रही प्रतिरोधत्मक क्षमता को मानव स्वास्थ के लिए वैश्विक खतरे की संज्ञा दी है। डब्ल्यूएचओ ने 114 देशों में विश्लेषण करते हुए रिपोर्ट में एक ऐसे पोस्ट एंटीबायोटिक युग की आशंका जताई गई है, जिसमें लोगों के सामने फिर उन्हीं सामान्य सक्रंमणों के कारण मौत का खतरा होगा, जिनका पिछले कई दशकों से इलाज संभव हो रहा है। यह रिपोर्ट मलेरिया, निमोनिया, डायरिया और रक्त संक्रमण का कारण बनने वाले सात अलग-अलग जीवाणुओं पर केंद्रित है। चिकित्सकों द्वारा इन दवाओं की सलाह देना और मरीज की ओर से दवा की पूरी मात्रा न लेना भी इसकी प्रमुख वजह है। रिपोर्ट के अनुसार अध्ययन में शामिल आधे से ज्यादा लोगों पर दो प्रमुख एंटीबायोटिक का प्रभाव नहीं पड़ा। स्वाभाविक तौर पर जीवाणु धीरे-धीरे एंटीबायोटिक के विरूद्ध अपने अंदर प्रतिरक्षा क्षमता पैदा कर लेता है, लेकिन इन दवाओं के हो रहे अंधाधुंध प्रयोग से यह स्थिति अनुमान से कहीं ज्यादा तेजी से सामने आ रही है।

– ईएमएस