सुप्रीम कोर्ट में एयरफोर्स ने कहा, ३३ साल से नहीं मिला कोई लड़ाकू विमान


सुप्रीम कोर्ट ने राफेल लड़ाकू विमान खरीदे जाने के मामले की न्यायालय की निगरानी में जांच के लिये दायर याचिकाओं पर सुनवाई खत्म हो गई है।

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय वायु सेना के लिये फ्रांस से ३६ राफेल लड़ाकू विमान खरीदे जाने के मामले की न्यायालय की निगरानी में जांच के लिये दायर याचिकाओं पर सुनवाई खत्म हो गई है। करीब ४ घंटे तक चली बहस के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा है। भोजनावकाश के बाद फिर से सुनवाई शुरू हुई थी। जिसके बाद एयर वाइस मार्शल चलपति ने कोर्ट पहुंचकर मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के सवालों का जवाब दिया। इससे पहले उच्चतम न्यायालय ने कहा कि राफेल लड़ाकू विमानों की कीमतों पर कोई भी बहस तभी हो सकती है जब इस सौदे के तथ्य जनता के सामने आने दिये जायें। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि हमें यह निर्णय लेना होगा कि क्या कीमतों के तथ्यों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए या नहीं। पीठ ने अटार्नी जनरल के.के.वेणुगोपाल से कहा कि तथ्यों को सार्वजनिक किये बगैर इसकी कीमतों पर किसी भी तरह की बहस का सवाल नहीं है। पीठ ने अटार्नी जनरल को स्पष्ट किया है कि यदि वह महसूस करेगी कि ये तथ्य सार्वजिनक होने चाहिए, तभी इनकी कीमतों पर बहस के बारे में विचार किया जायेगा।

केंद्र की ओर से जब अटार्नी जनरल के.के.वेणुगोपाल ने बहस शुरू की तो पीठ ने ३६ राफेल विमानों की खरीद के मामले में भारतीय वायु सेना के किसी अधिकारी से भी सहयोग का आग्रह किया। पीठ ने कहा कि हम वायु सेना की जरूरतों पर विचार कर रहे हैं और हम राफेल विमान के बारे में वायु सेना के किसी अधिकारी से जानना चाहेंगे। हम इस मुद्दे पर रक्षा मंत्रालय के अधिकारी को नहीं बल्कि वायु सेना के अधिकारी को सुनना चाहते हैं। वेणुगोपाल ने कहा कि वायु सेना के एक अधिकारी कुछ मिनटों में ही यहां पहुंचने वाले हैं। अटार्नी जनरल ने बहस के दौरान राफेल विमानों की कीमतों से संबंधित गोपनीयता के प्रावधान का बचाव किया है। यदि कीमतों के बारे में सारी जानकारी सार्वजनिक कर दी गयी तो हमारे शत्रु इसका लाभ ले सकते हैं।

वेणुगोपाल ने कहा कि कीमतों के मुद्दे पर वह न्यायालय की और अधिक मदद नहीं कर सकेंगे। अटार्नी जनरल ने कहा कि मैंने खुद भी इसका अवलोकन नहीं करने का निर्णय किया क्योंकि इसके लीक होने की स्थिति में मेरा कार्यालय इसके लिये जिम्मेदार होगा। यह विषय विशेषज्ञों के लिये है और, ‘‘हम लगातार कह रहे हैं कि इन विमानों की पूरी कीमत के बारे में संसद को भी नहीं बताया है।

उन्होंने कहा कि नवंबर, २०१६ की विनिमय दर के आधार पर सिर्फ लड़ाकू विमान की कीमत ६७० करोड़ थी। भारत ने अपनी वायु सेना को सुसज्जित करने की प्रक्रिया में उड़ान भरने के लिये तैयार अवस्था वाले ३६ राफेल लड़ाकू विमान फ्रांस से खरीदने का समझौता किया था। इस सौदे की अनुमानित लागत ५८,००० करोड़ रु है। वेणुगोपाल ने कहा कि पहले इन विमानों को जरूरी हथियार प्रणाली से लैस नहीं किया जाना था और सरकार की आपत्ति इस तथ्य को लेकर ही है कि वह अंतर-सरकार समझौता और गोपनीयता के प्रावधान का उल्लंघन नहीं करना चाहती। सुप्रीम कोर्ट ने अतिरिक्त रक्षा सचिव से पूछा कि ऑफसेट के दिशानिर्देशों में २०१५ में बदलाव क्यों किए थे। इसमें क्या देश हित है? साथ ही कहा कि क्या होगा यदि ऑफसेट पार्टनर कोई उत्पादन नहीं करता? अटार्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल ने केंद्र से पूछा कि डेसॉल्ट ने अभी तक ऑफसेट पार्टनर का विवरण क्यों नहीं दिया है? सुप्रीम कोर्ट ने २०१५ के ऑफसेट के दिशानिर्देशों के बदवाल के बारे में भी पूछा है। वहीं एयर फोर्स ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि १९८५ के बाद से हमें कोई नया विमान नहीं मिला है।

– ईएमएस