वाट्स अप के जरिये जाली नोटों का कारोबार


मधेपुरा । जाली नोटों का कारोबार चीन से जुड़ा हुआ है। चीन से पाकिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश के रास्ते जाली नोट भारत भेजे जा रहे हैं। कोसी व सीमांचल क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक एजेंट इन नोटों को देश के विभिन्न हिस्सों में पैâला रहे हैं। खुफिया विभाग की इस रिपोर्ट पर पुलिस भी सतर्वâ है। रिपोर्ट के अनुसार जाली नोटों का कारोबार तीन श्रेणियों में बंटा हुआ है। इनके अलावा एक खास श्रेणी भी है। अलग-अलग कीमत के नोटों को मंगाने के लिए अलग-अलग कोड है। सारा कारोबार ह्वाट्स एप के माध्यम से होता है। पिछले दिनों मुरलीगंज से दो लाख रुपये के साथ पकड़े गए एक तस्कर ने पुलिस के सामने कई राज उगले हैं। उसने बताया कि एक लाख रुपये के जाली नोटों को खरीदने में २५ से ४० हजार असली रुपये लगते हैं। तीनों श्रेणियों के नोटों की कीमत अलग-अलग होती है। ए श्रेणी के एक लाख के जाली नोट के लिए ४० हजार, तथा बी और सी श्रेणी के जाली नोट के लिए २५ से ३० हजार रुपये का भुगतान करना होता है। ए श्रेणी के जाली नोट असली नोटों से काफी मिलते-जुलते हैं। इस कारण शहरी क्षेत्रों में इन्हें खपाया जाता है। बी और सी श्रेणी के नोटों को ग्रामीण इलाकों में खपाया जाता है। खास श्रेणियों के नोटों में काले रंग के नोट आते हैं।पकड़े गए व्यक्ति का कहना था कि केमिकल में नोट डालने के साथ ही इनका काला रंग समाप्त हो जाता है और यह मूल रूप में आ जाता है। कोसी व सीमांचल क्षेत्र में दो दर्जन मुख्य एजेंटों के अलावा कई अन्य लोग भी इस काम से जुड़े हुए हैं। जाली नोटों के सौदागर फर्जी नाम व पते पर अपना कारोबार चलाते हैं। सभी एजेंटों के पास एक गुप्त कोड होता है। इससे पता चलता है कि नोट मंगाने के लिए वे ही संदेश दे रहे हैं।