दिल्ली दूर हो सकती है बीजेपी के लिए


नई दिल्ली । झारखंड और जम्मू-कश्मीर के नतीजों से बीजेपी के लिए दिल्ली फतह अब दूर नजर आ रही है। झारखंड में बीजेपी ने मिशन ४४ चलाया था, लेकिन वहां इस आंकड़े को बीजेपी नहीं छू पाई। घाटी में भी मोदी का जादू नहीं चला। माना जा रहा है कि इस तरह के नतीजों से दिल्ली की राह भी आसान नजर नहीं आ रही है। अगर फरवरी में दिल्ली में चुनाव होते हैं तो त्रिलोकपुरी और बवाना में हुए हिंदू-मुस्लिम तनाव का नुकसान भी बीजेपी को उठाना पड़ सकता है। इस तरह के तनाव के कारण ही कश्मीर में मोदी का जादू पूरी तरह से नहीं चल पाया। अब दिल्ली में देखना है कि मोदी का कितना जादू चल पाता है। जिस तरह से जम्मू कश्मीर में लोगों के पास पीडीपी एक विकल्प है, ऐसे ही दिल्ली में भी लोगों के पास आम आदमी पार्टी भी एक विकल्प है। तमाम सर्वे भी बता रहे हैं कि भले ही दिल्ली में बीजेपी को बहुमत मिले, लेकिन मुख्यमंत्री के रूप में लोगों को सबसे ज्यादा आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ही पसंद आ रहे हैं। लोगों को बिजली-पानी के घटे हुए ५० फीसदी बिल अभी भी याद हैं। चूंकि दिल्ली के चुनावों में बिजली-पानी का एक बड़ा मुद्दा है, ऐसे में बीजेपी के लिए मुश्किलें हो सकती हैं। मुनक नहर से दिल्ली को अभी तक पानी मिलने की सूरत भी नजर नहीं आ रही है, उल्टे रोज-रोज हरियाणा की ओर से यमुना में बहाया जा रहा कचरा दिल्ली में पानी की किल्लत पैदा कर रहा है। अगर फरवरी में चुनाव होते हैं तो इसका नुकसान भी बीजेपी को उठाना पड़ सकता है। दूसरी ओर, भले ही ऊपरी लेवल पर बीजेपी की लहर दिख रही हो, लेकिन जमीनी लेवल पर ऐसा नहीं है। बीजेपी के कई नेता भी मानते हैं कि ग्राउंड लेवल पर अभी भी काम करने की जरूरत है। वोटरों का अभी भी केजरीवाल से मोह भंग नहीं हुआ है। ऐसे में बीजेपी को अपनी रणनीति में भी बदलाव करना पड़ेगा। यह तस्वीर बीजेपी के सांसदों की मीटिंग से भी साफ नजर आती है। अधिकतर मीटिंगों में कुर्सियां खाली पड़ी हुई थीं। ऐलान किया गया था ३०० सांसद मीटिंग करेंगे, लेकिन १०० ही सांसद मीटिंग कर पाए। ऐसे हालात से बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह भी खफा हुए थे।