कश्मीर में किसकी सरकार, जोड़तोड़ जारी


श्रीनगर । जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनावों के परिणामो ने सबको कश्मकश में डालकर रखा है सभी दल जोड़तोड़ में जुटे हुए हैं , हांलाकि बीजेपी ने घाटी में सरकार बनाने को लेकर रणनीति बनानी शुरू कर दी है। इसी मुद्दे पर बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बीजेपी संसदीय बोर्ड की बैठक में बोर्ड ने जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाने का पैâसला किया है। सूत्रों के अनुसार पार्टी के नेताओं ने दावा किया कि जम्मू-कश्मीर में निर्दलीय और छोटे दलों के छह विधायक बीजेपी के साथ हैं। इस तरह भाजपा के पास ३१ विधायकों का समर्थन है। इसलिए पार्टी राज्य में सरकार बनाने की कोशिश करेगी। बताया जा रहा है कि बीजेपी पीडीपी के साथ ३-३ साल सरकार चलाने के फॉर्मूले पर गंभीरता से विचार कर रही है। पार्टी अध्यक्ष अमित शाह पहले ही यह साफ कर चुके हैं कि उनके सामने सभी विकल्प खुले हुए हैं। दरअसल प्रदेश में दूसरे नंबर पर रहने के बावजूद सबसे ज्यादा वोट पाने वाली भाजपा इस अवसर को खोना नहीं चाहती। र्तािकक आधार यह है कि जम्मू क्षेत्र के जनादेश को नजरअंदाज कर सरकार बनाना वाजिब नहीं होगा।
नतीजा यह है कि घाटी में सबसे बड़ी पार्टी बनी पीडीपी या घाटी से सीटें जीतने वाले नेशनल कांप्रेंâस को भाजपा के साथ ही सरकार बनाना होगा। पीडीपी और कांग्र्रेस गठबंधन की संभावनाएं बन सकती हैैं लेकिन सज्जाद लोन की पार्टी पहले ही भाजपा के साथ है। स्वतंत्र विधायकों के रूप में जीते अन्य चार भी भाजपा के संपर्वâ में हैं। ऐसे में उनके लिए ४४ का जरूरी आंकड़ा जुटाना बहुत आसान नहीं है। भाजपा इन आंकड़ों के साथ पैâसला पीडीपी और नेशनल कांप्रेâस पर छोड़ना चाहती है। दोनों ही सूरत में भाजपा की कोशिश होगी कि सीएम भाजपा के खाते से बने और सहयोगी दल वेंâद्र में भी शामिल हो। वहीं पीडीपी ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं। पीडीपी का कहना है कि वह किसी जल्दबाजी में नहीं है और फिलहाल इंतजार करेगी। हालांकि, पीडीपी के लिए मुाqश्कल यह है कि वह वेंâद्र से बेहतर रिश्तों के लिए बीजेपी का समर्थन ले या वोटरों द्वारा नकारे गए कांग्रेस का सहारा ले।
पीडीपी के प्रवक्ता नईम अख्तर ने भी कहा कि विचारधारा को लेकर हमारा भाजपा के साथ मतभेद है, लेकिन ाqस्थर सरकार देने के लिए हम समर्थन देने पर विचार कर सकते हैं। ऐसे में, माना जा रहा है कि दोनों र्पािटयां एक-दूसरे के साथ आ सकती हैं। बता दें कि पीडीपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। बीजेपी ने भी दूसरा स्थान हासिल किया है। नेशनल कॉन्प्रेंâस तीसरे और कांग्रेस चौथे नंबर पर खिसक गई है। उधर नेशनल कॉन्प्रेंâस नेता उमर अब्दुल्ला ने कह दिया है कि वह जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाने के लिए पीडीपी का समर्थन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि हम पीडीपी को समर्थन देने के लिए तैयार हैं, यदि मुफ्ती मोहम्मद सईद फोन रिसीव करें या मुझे कॉल करें। यदि लालू और नीतीश कुमार साथ आ सकते हैं तो हम क्यों नहीं? मैं मुफ्ती साब के घर नहीं जा रहा हूं, लेकिन वह १५ विधायकों वाली नेशनल कॉन्प्रेंâस को इग्नोर नहीं कर सकते।
० राजनितिक विशेषेज्ञो की मने तो सबसे आसान रास्ता है-
पीडीपी और भाजपा की सरकार बनना। वे पहले से भी दुश्मन तो नहीं ही हैं। इस तरीके से जो सरकार बनेगी तो वह पूरे जम्मू-कश्मीर को रिप्रेजेंट भी कर सकेगी। सबसे ज्यादा स्थायी सरकार भी यही होगी। र्आिथक पैकेज और दूसरी सहूलियतों की खातिर पीडीपी को वेंâद्र के पाले में रहने की जरूरत होगी। इस लिहाज से भी पीडीपी के लिए भाजपा का साथ लेना फायदेमंद होगा।

उमर का इशारा, भाजपा की बढ़ी परेशानी 
श्रीनगर। उमर अब्दुल्ला की गुगली से बीजेपी की रणनीति बैकपुâट पर आ सकती है। उमर ने कहा कि वह जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाने के लिए पीडीपी का समर्थन कर सकते हैं। बीजेपी चीफ अमित शाह ने चुनावी नतीजे आने के बाद कहा था कि सारे विकल्प खुले हैं। लेकिन उमर की इस गुगली से बीजेपी दूसरी बड़ी पार्टी बनकर भी कुछ नहीं कर पाएगी।
उमर अब्दुल्ला ने कहा, ‘हम पीडीपी को समर्थन देने के लिए तैयार हैं यदि मुफ्ती मोहम्मद सईद फोन रिसीव करें या मुझे कॉल करें। यदि लालू और नीतीश कुमार साथ आ सकते हैं तो हम क्यों नहीं? मैं मुफ्ती साब के घर नहीं जा रहा हूं लेकिन वह १५ विधायकों वाली नैशनल कॉन्प्रेंâस को इग्नोर नहीं कर सकते।, उमर ने कहा कि बीजेपी को समर्थन करने पर ९९ पर्सेंट नहीं है। हालांकि यह कहने के तत्काल बाद उमर ने इस बयान को संशोधित करते हुए कहा कि फिलहाल हम कुछ भी वादा नहीं कर सकते।
उमर अब्दुल्ला ने चुनावी नतीजों के बाद कहा, ‘यह मेरी नहीं महबूबा मुफ्ती की नाकामी है। अफजल गुरु की फांसी और भयानक बाढ़ के बाद भी मुफ्ती को बहुमत नहीं मिला तो यह उनकी नाकामी है।’उमर ने कहा, ‘राज्यसभा में जाने के लिए कांग्रेस नेता गुलाब नबी आजाद कुछ भी करने को तैयार हैं। उन्हें मुफ्ती साहब के पैर भी पड़ने पड़े तो वह पडेंगे। हम ६ साल अच्छा विपक्ष बनने के लिए तैयार हैं। जम्मू कश्मीर की जनता के शुक्रगुजार हैं कि उन्होंने पार्टी को तवज्जो दी।’
इधर पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती ने चुनावी नतीजों के बाद मीडिया से बातचीत में अभी खुलासा नहीं किया कि वह किसके समर्थन से सरकार बनाएंगी। उन्होंने कहा कि पीडीपी प्रदेश में अजेंडा वाली सरकार बनाएगी। महबूबा ने कहा, ‘हम लोगों की उम्मीदों का खयाल रखते हुए समर्थन लेने पर पैâसला करेंगे। सरकार वैâसे बनेगी कहना मुाqश्कल है। हम प्रदेश में भरोसे वाली सरकार बनाना चाहते हैं ताकि पीडीपी का अजेंडा आगे बढ़े।’