आजाद भारत का ‘गुलाम गांव’: यहां आज तक नहीं फहराया तिरंगा


नई दिल्ली (ईएमएस)। देश को आजादी ७० साल हो चुके हैं। देश में एक ऐसा भी गांव है, जहां आज तक एक भी बार तिरंगा नहीं फहराया गया है। यहां ना तो गणतंत्र दिवस मनाया जाता है और ना ही स्वतंत्रता दिवस। हरियाणा का एक गांव ऐसा है जो अपने आप को आज भी गुलाम मानता है। हरियाणा स्थित रोहनात गांव के लोग आज भी अपने आपको गुलाम मानते हैं। करीब ४२०० की आबादी वाले इस गांव में आजादी के बाद से ना तो कभी गणतंत्र दिवस मनाया गया और ना ही स्वतंत्रता दिवस। दरअसल, अंग्रेजों ने रोहनात गांव में भी जलियांवाला बाग जैसा नरसंहार किया था। दरअसल, यहां के लोगों को १८५७ के क्रांति में भाग लेने की खौफनाक सजा दी गई थी। गांव में रहने वाले ओमप्रकाश शर्मा बताते हैं कि अंग्रेजों ने तोप चलाकर गांव को तबाह कर दिया। यहां के पुरुषों को बंदी बनाकर हांसी ले जाया गया। वहां उनपर रोड रोलर चलाकर उनकी हत्या कर दी गई। अपनी आबरू बचाने के लिए गांव की महिलाएं जिस कुएं में कूदी थीं और जिस बरगद के पेड़ पर गांव के नौजवानों को फांसी पर लटकाया गया था, वो कुआं और बरगद का पेड़ आज भी अंग्रेजों के दिए दर्द के गवाह के रूप में मौजूद हैं। ओमप्रकाश ने बताया कि पूरे गांव को सिर्फ ८१०० रुपए में नीलाम कर दिया गया। वहीं नीलामी का दर्द ग्रामीण आज भी अपने आप में समेटे हुए है। गांव के सरपंच प्रतिनिधि रविंद्र बूरा ने कहा कि नीलामी के कुछ सालों बाद ग्रामीणों ने मेहनत के दम पर आस-पास की जमीन खरीद ली। सरकारी रिकॉर्ड में आज भी रोहनात के साथ उन गांवों के नाम भी जुड़े है, जिन्होंने नीलामी में उसे खरीदा था। सरकारी रिकॉर्ड में दिक्कत के कारण विकास कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। गुलामी की छाप से छुटकारा पाने के लिए यहां के लोगों ने सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाए। आश्वासन हर जगह मिले, पर काम नहीं बना।
– क्या है मामला
ग्रामिण दलबीर सिंह का कहना है कि सरकार ने बीड एरिया में प्लॉट देने की बात कही थी, लेकिन अभी तक कुछ नहीं मिला है। आजादी के ७० सालों में देश के हर हिस्से में गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस मनाए जाते रहे है। लेकिन रोहनात में ऐसा कभी नहीं हुआ। इस बार का गणतंत्र दिवस रोहनात के लिए खास रहेगा। दरअसल, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर यहां गणतंत्र दिवस मनाने जा रहे है। गांव के दादी गौरी मंदिर के मैदान में समारोह होगा। ग्रामीणों को उम्मीद है कि उन्हें सरकार गुलामी के दर्द से आजादी मिलेगी।