सौहराबुद्दीन-तुलसी मुठभेड़ केस में सभी आईपीएस बरी


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अहमदाबाद | गुजरात के बहुचर्चित सौहराबुद्दीन शेख और तुलसी प्रजापति केस के आरोपी डीजी बंजारा समेत सभी आईपीएस को मुंबई हाईकोर्ट ने आज बरी कर दिया| निचली अदालत से दोषी करार दिए गए विपुल अग्रवाल को भी हाईकोर्ट ने आरोप मुक्त किया है|

अहमदाबाद में 2005 में गुजरात और राजस्थान की पुलिस ने संयुक्त मुठभेड़ में राजस्थान के कुख्यात सौहराबुद्दन शेख को मार गिराया था| जिसके बाद उसकी पत्नी कौसर की भी हत्या कर दी गई थी| इस मामले के महत्वपूर्ण गवाह और सौहराबुद्दीन शेख के साथी तुलसी प्रजापति को पुलिस ने अंबाजी के निकट छापरी में एन्काउन्टर में मार दिया था| उस वक्त पुलिस ने दावा किया था कि सौहराबुद्दीन शेख आतंकवादी था|

जबकि पुलिस कस्टडी से फरार तुलसी प्रजापति को पकड़ने गई पुलिस पर उसने फायरिंग की थी| जिसके जवाब में की गई पुलिस फायरिंग में तुलसी प्रजापति की मौत हो गई थी| इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका के बाद गुजरात सीआईडी और बाद में सीबीआई को जांच सौंपी गई थी| गुजरात सीआईडी और बाद में सीबीआई की जांच गुजरात पुलिस की थियरी गलत पाई गई और सौहराबुद्दीन व तुलसी की फर्जी मुठभेड़ में हत्या का आरोप लगाते हुए आरोप पत्र दाखिल किया गया था| हांलाकि निचली अदालत ने गुजरात के आईपीएस डीजी बंजारा, नरेन्द्र अमीन, राजकुमार पांडियन, राजस्थान के दिनेश एमएन को बरी कर दिया था| जबकि विपुल अग्रवाल को दोषी करार दिया गया था|

निचली अदालत के फैसले के खिलाफ मुंबई हाईकोर्ट में अपील की गई थी| मुंबई हाईकोर्ट में निचली अदालत में दोषी और बरी किए गए सभी आईपीएस ने उनका इन मामलों से कोई लेना देना नहीं है और उन्हें गलत तरीके से फंसाया होने का दावा करते हुए आरोप मुक्त करने की अर्जी की थी| अर्जी पर सुनवाई करते हुए मुंबई हाईकोर्ट ने सभी विपुल अग्रवाल, डीजी बंजारा, नरेन्द्र अमीन, राजकुमार पांडियन और दिनेश एमएन को बरी कर दिया|