ओवरी का आकार बदलत रहता है


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ओवरी के बारे में आम तौर पर महिलाओं को ज्यादा जानकारी नहीं होती जो होनी चाहिये। यही वो अंग है जहां अंडे बनते हैं। यह अंडे जब शुक्राणुओं से मिलते हैं तो महिला गर्भवती होती है। शरीर के बाकी अंग भले ही एक साइज़ पर आकर रुक जाएं, ओवरीज़ हमेशा बदलती रहती हैं। ये उम्र के साथ और पीरियड्स के दौरान साइज़ में बदलती रहती हैं। जब ये अंडा बना रही होती है तो ये आकार में बढ़ जाती हैं. लगभग पांच सेंटीमीटर। वहीं कई बार सिस्ट यानी गठान हो जाने की वजह से भी साइज़ में फ़र्क पड़ता है पर ये कोई घबराने वाली बात नहीं है। मेनोपॉज़ के साथ ये बदलना बंद कर देती हैं। उल्टा सिकुड़ जाती हैं।

ओवरी पर पड़ता है तनाव का असर

जिस समय ओवरीज़ अंडे बना रही होती हैं उसे ओव्यूलेशन कहते हैं। वहीं तनाव का इस पर विपरीत असर पड़ता है। मतलब अगर आप वाकई बहुत ज़्यादा तनाव में हैं, तो आपकी ओवरीज़ अंडे बनाना बंद कर देगी.

बर्थ कंट्रोल पिल से घटता है ओवेरियन कैंसर का खतरा

डॉक्टरों की माने तो बर्थ कंट्रोल पिल्स ओवरीज़ का बड़ा फ़ायदा करती हैं। सुनने में अजीब लगा क्या? पर ये सच है। गर्भनिरोधक गोलियों को लेने से ओवेरियन कैंसर होने का खतरा काफ़ी कम हो जाता है।

ओवेरियन सिस्ट अकसर अपने आप ठीक हो जाते हैं

ओवरी में बहुत सी महिलाओं को सिस्ट हो जाता है। सिस्ट कैविटी-नुमा होती है जिसमें पस भर जाता है। इसे ठीक करने के लिए सर्जरी है और दवाइयां भी दी जाती हैं पर हर सिस्ट ख़तरनाक नहीं होता। कई सिस्ट बिना किसी दवा के तीन से चार महीनों में अपने आप ठीक हो जाते हैं। वहीं अगर ये ठीक नहीं हुआ तो डॉक्टर को दिखाएं।