अच्छे और बुरे में फर्क कर सकते हैं बच्चे, खुद के लिए हमेशा चुनते हैं अच्छा


एक अध्ययन में सामने आया है कि छोटे बच्चे अच्छे और बुरे में फर्क कर सकते हैं। बच्चे खुद के लिए हमेशा अच्छा ही चुनते हैं।
अध्ययन से हुआ खुलासा

नई दिल्ली। एक अध्ययन में सामने आया है कि छोटे बच्चे अच्छे और बुरे में फर्क कर सकते हैं। बच्चे खुद के लिए हमेशा अच्छा ही चुनते हैं। इससे पता चलता है कि छोटे बच्चे नैतिकता ठीक से समझते हैं और उसका ईमानदारी से पालन भी करते हैं। इसका अर्थ यह हुआ कि हरे बच्चा जन्मजात अच्छा होता है और वह बुराइयां अपने आसपास के परिवेश से सीखता है। यह पुरानी भारतीय कहावत इस निष्कर्ष के काफी नजदीक है कि बच्चे कच्ची मिट्टी की लोंदे की तरह होते हैं। उन्हें जैसा रूप देना चाहो, वे उसी रूप में ढल जाते हैं। बच्चों को भगवान का रूप भी बताया जाता है। बच्चों में कोई बुराई नहीं होती है और वे बड़े होने के क्रम में अपने आसपास के परिवेश से बुराइयां सीखते हैं। अब एक रिसर्च से यह बात पुख्ता हो गई है कि बच्चों के मन में कुछ बुरा नहीं होता है। यहां तक की छोटी उम्र से ही वे नैतिकता समझते हैं और अच्छे और बुरे में फर्क कर सकते हैं। एक स्टडी के तहत 1 साल से कम उम्र के बच्चों को कुछ पुतले दिखाए गए। ये पुतले अलग-अलग रंग के थे। लाल रंग का पुतला पहाड़ चढ़ने की कोशिश करता है, जिसे नीला पुतला नीचे ढकेलता है। वहीं पीले रंग का पुतला लाल पुतले को बचाने की कोशिश करता है और उसे ऊपर चढ़ने में मदद करता है। इसके बाद जब बच्चों को ये पुतले खेलने के लिए दिए गए तो सबने पीला पुतला ही चुना। यह भी सुनिश्चित करने के लिए कि कहीं बच्चे रंग की वजह से तो इसे नहीं चुन रहे हैं। इसके लिए बच्चों को फिर से वही खेल दिखाया गया। इस बार रंगों के रोल में बदलाव कर दिया गया। लेकिन हर बार बच्चों ने मदद करने वाले पुतले को ही खेलने के लिए चुना।

येल यूनिवर्सिटी द्वारा किए गए इस रिसर्च में 7 महीने छोटा बच्चा भी नैतिकता समझने में सक्षम था। इसके अलावा क्योटो यूनिवर्सिटी द्वारा किए गए एक रिसर्च में भी बच्चों को एक विडियो दिखाए गए जिसमें एक विक्टिम, एक बुली और एक मदद करने वाले को दिखाया गया। यहां भी बच्चों ने मदद करने वाले को ही पसंद किया। इससे साफ है कि भले ही बड़े होने पर नैतिकता हमारा विकल्प होती है लेकिन बच्चे सही और गलत में फर्क करके हमेशा सही के साथ ही होते हैं।

– ईएमएस