लोगों की खराब लाइफस्टाइल दे रही बीमारियों को निमत्रंण


नई दिल्ली (ईएमएस)। आज के युग में बदहाल होती लोगों की लाइफ स्टाइल लोगों के लिए बढ़ी परेशानी का कारण बन गया है। इसके कारण देश में लाइफ स्टाइल से जुड़ी बीमारियां मौत की बड़ी वजह बन गई हैं। सीएसई की नई रिपोर्ट में पर्यावरण और स्वास्थ्य के बीच गहरा नाता होने की बात साबित हुई है। इनमें से कुछ पर और रिसर्च किए जाने की जरूरत है जैसे वायु प्रदूषण व मेंटल हेल्थ। सीएसई ने ‘बॉडी बर्डन’ नाम से अपनी यह रिपोर्ट जारी की है। इसमें साफ कहा गया है है भारत में होने वाली कुल मौतों में से 61 फीसदी केवल लाइफ स्टाइल और गैर संचारी रोगों (नॉन कम्युनिकेबल डीजीज) की वजह से होती हैं। 2005 से 2015 के बीच मोटापे से जूझ रहे लोगों की संख्या दोगुनी हुई है।

15 से 49 आयु के लोगों में 20.7 फीसदी महिलाएं और 18.6 परसेंट पुरुष ओवरवेट हैं।18 साल से ऊपर के लोगों में 10 फीसदी लोग दिमागी बीमारियों से जूझ रहे है। देश के 150 मिलियन लोग किसी न किसी मेंटल डिसऑर्डर से जूझ रहे है।पीएम 2.5 में 4.34 एमजीसीएम की वृद्धि से अल्टशाइमर्स का खतरा बढ़ता है।जानकारों की माने तो 2020 तक भारत में 1.73 मिलियन कैंसर के नए मामले हर साल आने की संभावना है। घरों में आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले कैमिकल और कॉस्मेटिक में कैंसर कंपाउंड होते हैं। एक अनुमान के अनुसार 20 फीसदी कैंसर के मामलों में वातावरण के फैला जहर भी कारण है। इसकी मुख्य वजह तंबाकू,एल्कॉहॉल,प्रदूषित हवा,मीट रिच डायट आदि हैं। भारत में होने वाली मौतों में 26 फीसदी की वजह दिल की बीमारी होती हैं। पुरुष और युवाओं में यह अधिक होती है।

शहरी भारत में युवा और मध्यम वर्ग के लोग इसकी चपेट में हैं तो ग्रामीण इलाकों में बड़ों में यह रिस्क अधिक होता है। इस कम करने के लिए पैदल चलने और साइकल ट्रैक को बढ़ावा देना जरूरी है। भारत में करीब 35 मिलियन गंभीर अस्थमा मरीज हैं। ये आंकड़े 2016 के हैं। प्रदूषण के अलावा वाहन और इंडस्ट्री व ग्लोबल वार्मिंग की वजह से यह बढ़ रही हैं। हर 12वां भारतीय डायबीटिक है। अन्य हॉर्मोनल बीमारियों के आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं,लेकिन एक छोटी स्टडी के अनुसार हर 10वां अडल्ट हाइपोथायरायडिज्म से पीड़ित है। माना जाता है कि 25 से 40 मिलियन लोग देश में फूड ऐलर्जी से जूझ रहे हैं।करीब 170 तरह के खाने से लोगों को एलर्जी है।