मिसाइल की गति से खींचती है एमआरआई मशीन, बंद होने के बाद भी बना रहता है चुंबकीय क्षेत्र


नई दिल्ली (ईएमएस)। मुंबई के एक अस्पताल में उपचाररत अपनी मां से मिलने गए राजेश मारू नाम के युवक की एमआरआई मशीन के चुंबकीय क्षेत्र में फंसने से मौत हो गई। हादसे के समय उसके हाथ में आक्सीजन का सिलिंडर था। दरअसल, एमआरआई मशीन मिसाइल जितनी गति से लोहे को अपनी ओर खींचती है। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति लोहे का सिलेंडर लेकर मशीन के चुंबकीय क्षेत्र में प्रवेश कर जाए, तो वह उसे भी तेजी से अपनी ओर खींच लेगी। मुंबई में ऐसी एक घटना पहले भी हो चुकी है। दिल्ली के आरएमएल में भी एक बार ऐसा हुआ था, हालांकि इस घटना में किसी की जान नहीं गई थी।
फोर्टिस के रेडियॉलजिस्ट डॉक्टर अभिषेक बंसल का कहना है कि एमआरआई मशीन अपने आसपास इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड बनाती है। आजकल एमआरआई मशीन में 1.3 से 3 टैक्सला मशीन का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसमें पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण ताकत से 20 से 40 हजार गुना ज्यादा तेजी से चीजों को खींचने की शक्ति होती है। इंडियन रेडियॉलजी एंड इमेज असोसिएशन की दिल्ली ब्रांच के उपाध्यक्ष डॉक्टर राहुल सचदेव ने कहा कि एमआरआई मशीन का चुंबक कभी बंद नहीं होता। अगर मशीन से जुड़ा कंप्यूटर बंद भी कर दिया जाए तो भी मशीन काम करती रहती है। उन्होंने बताया कि इससे पहले मुंबई में टाटा हॉस्पिटल में भी ऐसी ही घटना हो चुकी है।
इस बारे में एशियन इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस के रेडियॉलाजी विभाग के एचओडी डॉक्टर संदीप माखन ने बताया कि एमआरआई रूम में हमेशा धातु की चीजों को बाहर रखने के लिए बोला जाता है। यहां तक कि अगर किसी को पेसमेकर लगाया जाता है तो उसका एमआरआई नहीं होता है। इसकी वजह होती है कमरे के अंदर मैग्नेटिक स्ट्रेंथ। मुंबई मामले में युवक जैसे ही सिलेंडर पकड़ कर अंदर गया, वह तेजी से मशीन की तरफ खिंच गया। पहले तो उसे बहुत चोट लगी होगी। दूसरे सिलेंडर की नॉब खुलने से गैस उसके पेट में चली गई। सिलेंडर में सौ फीसदी शुद्ध ऑक्सीजन होती है। अगर यह जरूरत से ज्यादा फेफड़े में चली जाए तो व्यक्ति की जान भी जा सकती है। उन्होंने कहा अगर रूम के अंदर सामान्य निडिल भी गोली की रफ्तार से मशीन की तरफ जाती है। डॉक्टर बंसल ने बताया कि कुछ साल पहले आरएमएल अस्पताल में कुछ ऐसा ही मामला सामने आया था। इस घटना में एक मरीज ह्वीलचेयर के साथ रूम में पहुंच गया था। घटना में किसी की मौत तो नहीं हुई, लेकिन मशीन को महीनों तक के लिए बंद करना पड़ा था। डॉक्टरों की मानें तो एमआरआई रूम में चुंबकीय क्षेत्र तुरंत बंद नहीं हो सकता। चुंबकीय शक्ति कम होने में कई घंटे लग जाते हैं। तब तक इंसान मशीन से चिपका ही रहता है।