मुझे हैंडसम बताए जाने को मैं तवज्जो देता हूं: सिद्दीकी


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हॉलिवुड पत्रकारों द्वारा उन्हें कहा गया ‘हैंडसम’

मुंबई। हॉलिवुड पत्रकारों द्वारा ‘हैंडसम’ कहने और इटैलियन ऐक्टर मार्सेलो मास्ट्रोयानी से तुलना करने पर अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने कहा, ‘अमेरिकन सिनेमा पर किताबें छापने वाले बेस्ट पब्लिशरों में से एक द्वारा मुझे हैंडसम बताए जाने को मैं तवज्जो देता हूं। मुझे कभी मेरे अपने देश में हैंडसम नहीं बुलाया गया, लोगों द्वारा नहीं, मेरा काम पसंद करने वाले क्रिटिक्स ने भी नहीं। इसलिए यह बड़ी छलांग है।’

उन्होंने कहा, ‘…और रही बात मार्सेलो से तुलना करने की तो वह इतने अच्छे अभिनेता हैं, इतने कुशल और इतनी दिलचस्पी से स्क्रीन पर प्रस्तुति देते हैं। जब मैं उन्हें निर्देशक विटोरियो डी. सिका की फिल्म में अभिनय करते हुए देखता हूं तो मुझे आश्चर्य होता है कि अभिनय में इस स्तर की वास्तविकता भी हो सकती है।’

सिद्दीकी का कहना है कि वह फिल्मी दुनिया के ग्लैमर की चकाचौंध की परवाह नहीं करते। अशोक कुमार और देव आनंद जैसे हमारे महान अभिनेताओं के संग्रहालय कहां हैं?’ ऐसे अन्य अभिनेताओं के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा, ‘मैं अभिनेताओं की प्रशंसा नहीं करता। मैं प्रदर्शन की प्रशंसा करता हूं। मैंने हॉन्गकॉन्ग की फिल्म इन द मूड फॉर लव देखी और मैं टोनी लेउंग के अभिनय देख स्तब्ध रह गया। मुझे लगता है कि बर्डमैन में मिशेल कीटन का अभिनय शानदार था लेकिन मुझे द वॉल्फ ऑफ द वॉलस्ट्रीट में लियोनार्डो डिकैप्रियो का अभिनय सबसे ज्यादा पसंद है। मुझे परफॉर्मेंस में अस्थिरता पसंद है।’

उन्होंने कहा, ‘मैं फिल्मी चकाचौंध के मायाजाल की परवाह नहीं करता, लेकिन मैं यह नहीं कहूंगा कि मैं रुपयों के बारे में नहीं सोचता, लेकिन यह बड़ी कमर्शल फिल्मों से ही आता है।’

नंदिता की फिल्म में मंटो बने नवाज

उधर विवादों में रहे लेखक ‘मंटो’ पर नंदिता दास ने फिल्म बनायी हैं। इसमें मंटो के किरदार में अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी हैं। ये फिल्म 21 सितंबर को रिलीज होने वाली है।

समाज के बारे में सदाअत हसन मंटो ने अपनी कहानियों में उस सच्चाई को बयां किया जिसे लिखने की हिम्मत हर किसी में नहीं होती। उन पर अश्लील कहांनिया लिखने का आरोप ही नहीं लगा बल्कि मुकदमे भी चलाए गए। उनकी कहांनियों को लेकर खूब विवाद हुआ। उन्हें कई बार अपनी लेखनी की वजह से कोर्ट जाना पड़ा लेकिन उन्होंने लिखना नहीं छोड़ा।

मंटो 43 साल की उम्र में वो दुनिया से अलविदा कर गए। मंटो अपने बारे में कहते हैं, ”मेरे जीवन की सबसे बड़ी घटना मेरा जन्म था। मैं पंजाब के एक अज्ञात गांव ‘समराला’ में पैदा हुआ। अगर किसी को मेरी जन्मतिथि में दिलचस्पी हो सकती है तो वह मेरी मां थी, जो अब जीवित नहीं है। दूसरी घटना साल 1931 में हुई, जब मैंने पंजाब यूनिवर्सिटी से दसवीं की परीक्षा लगातार तीन साल फेल होने के बाद पास की। तीसरी घटना वह थी, जब मैंने साल 1939 में शादी की, लेकिन यह घटना दुर्घटना नहीं थी और अब तक नहीं है। और भी बहुत-सी घटनाएं हुईं, लेकिन उनसे मुझे नहीं दूसरों को कष्ट पहुंचा। जैसे मेरा कलम उठाना एक बहुत बड़ी घटना थी, जिससे ‘शिष्ट’ लेखकों को भी दुख हुआ और ‘शिष्ट’ पाठकों को भी।’

मंटो में अपने अभिनय पर उन्होंने कहा, ‘मैंने सादत हसन मंटो की तरह जितना संभव हो सका उतना शांत और नियंत्रित रहने की कोशिश की। मंटो ने कभी ऊंची आवाज में बात नहीं की, फिर भी उन्हें लोगों को अपनी बात बताने में कभी परेशानी नहीं हुई। हम जितनी ऊंची आवाज में बात करते हैं उतना ही अपनी पहचान खोने की, अपनी असुरक्षा की भावना उजागर करते हैं। हम भारतीय भी ऊंची आवाज में बात करते हैं।’ ऊंची आवाज में बोलने के सवाल पर नवाजुद्दीन ने कहा, ‘अपनी दोस्त तनिशा चटर्जी की फिल्म की शूटिंग के लिए मैं 1.5 महीने रोम में था, तब मैं मार्सेलो को समर्पित संग्रहालय उनकी फिल्मों की कलाकृतियां देखने, उनके जीवन का अनुभव लेने गया जो मेरे लिए अद्भुत अनुभव रहा।