पेट्रोलियम पदार्थों के कीमत में कटौती संभवन नहीं, राजकोषीय घाटा बढ़ जायेगाः पीयूष गोयल


नई दिल्ली । पेट्रोल, डीजल के दाम को काबू में रखने को लेकर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को कहा कि सरकार जो रुख अपना रही है वह उचित है क्योंकि इन ईंधनों पर उत्पाद शुल्क में कटौती से राजकोषीय घाटा बढ़ेगा और समस्या कम होने की बजाए जटिल हो जाएगी।

उन्होंने यह बात ऐसे समय कही है जबकि विपक्ष पेट्रोलियम ईंधन के भाव में तेजी को लेकर उत्पाद शुल्क में कटौती की मांग कर रहा है। रेल और कोयला मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल रहे गोयल ने कहा कि पेट्रोलियम उत्पादों के मूल्य पर सरकार की सोच उचित है और वह समस्या को बढ़ाने वाला कोई कदम नहीं उठाना चाहती।

रेल मंत्री गोयल ने कहा कि ईंधन के दाम को लेकर सरकार का मौजूदा रुख बिल्कुल सही है। क्योंकि अगर उत्पाद शुल्क में कटौती की जाती है तो इससे राजकोषीय घाटा बढ़ेगा जिससे समस्या सुलझने के बजाए उलझेगी। रुपये की विनियम दर में गिरावट के साथ पेट्रोल की कीमत दिल्ली में करीब ८० रु जबकि डीजल की कीमत ७३ रु लीटर के आसपास पहुंच गयी है। ईंधन के दाम में तेजी के बीच उत्पाद शुल्क में कटौती की मांग की जा रही है। केंद्र फिलहाल पेट्रोल पर १९.४८ रुपये लीटर जबकि डीजल पर १५.३३ रुपये प्रति लीटर उत्पाद शुल्क वसूलती है। सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिये राजकोषीय घाटा ३.३ प्रतिशत रखने का लक्ष्य रखा है। गोयल ने कहा कि सरकार को कोई भी कदम दीर्घकाल में उसके पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखकर उठाना चाहिए न कि अल्पकालीन हितों को ध्यान में रखना चाहिए।

गोयल ने कहा कि ‘रुपये की विनिमय दर में गिरावट थामने के लिये आरबीआई ने २०१३ में विदेशी मुद्रा जुटाने को लेकर प्रवासी भारतीयों को बांड (एफसीएनआर (बी) जारी किये गये। इसके परिपक्व होने पर हमने २०१६-१७ में इसका भुगतान किया। इसी प्रकार, संप्रग शासन १.५ लाख करोड़ रुपये का तेल बांड जारी किया गया जिसमें से हमने अभी ५०,००० करोड़ रुपये दिया है।