(साप्ताहिक समीक्षा) संसद सत्र और तेल पर रहेगी बाजार की नजर


  • डॉलर के मुकाबले रूपये की चाल डालेगी असर

मुंबई। बीते सप्ताह सपाट करोबार कर चुके घरेलू शेयर बाजार की नजर इस सप्ताह मुख्य रूप से संसद के शीतकालीन सत्र के शेष दो सत्र की गतिविधियों, विदेशी संस्थागत निवेश के आंकड़ों, वैश्विक बाजारों के रुझान, डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल और तेल मूल्य पर बनी रहेगी। बाजार जानकारों का कहना है कि वायदा और विकल्प (एफएंडओ) सौदे की परिपक्वता के कारण इस सप्ताह शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव भरा कारोबार दिखाई दे सकता है।
गौरतलब है कि चार चार कारोबारी सत्र वाले सप्ताह में नवंबर महीने का सौदा बुधवार को परिपक्व होगा, क्योंकि गुरुवार को बाजार क्रिसमस के मौके पर बंद रहेगा। वहीं २४ नवंबर से जारी संसद के शीतकालीन सत्र का समापन के आखिरी दो सत्र इस सप्ताह में ही हैं। इन दो दिनों में आर्थिक महत्व के कई विधेयकों के पारित होने की उम्मीद थी, हालांकि अब उनके पारित होने की संभावना मामूली रह गई है। चालू सत्र में बीमा कानून (संशोधन) विधेयक के पारित होने की उम्मीद थी। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संविधान संशोधन विधेयक को सरकार ने बीते सप्ताह के शुक्रवार को लोकसभा में पेश कर दिया है।
बाजार जानकारों के मुताबिक निवेशकों की निगाह अगले हफ्ते कच्चे तेल की अंतर्राष्ट्रीय कीमत पर भी टिकी रहेगी। हाल के महीनों में तेल मूल्य में काफी गिरावट दर्ज की गई है। जानकारों के मुताबिक कच्चे तेल की कीमत घटने से सरकार को चालू खाता घाटा और ईंधन महंगाई दर कम करने में मदद मिलेगी। रुपये के अवमूल्यन से हालांकि तेल मूल्य गिरावट का फायदा सीमित रह सकता है। इसके साथ ही निवेशकों की निगाह अगले सप्ताह विमानन कंपनी स्पाइसजेट से संबंधित घटनाक्रमों पर भी टिकी रहेगी। कंपनी की उड़ानें पिछले दिनों तेल कंपनियों द्वारा साख आधार पर तेल देने से इंकार करने के कारण अवरुद्ध हो गई थी।