जल्द दूर होगी भारतीय हीरा बाजार की सुस्ती


नीरव मोदी स्कैंडल के चलते इस हीरा बाजार की नेगेटिव इमेज बनी है और बिक्री में विकास कुल मिलाकर घटा है, लेकिन मंदी का यह अस्थाई दौर है।
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कोलकाता (ईएमएस)। मुद्रा बाजार में पैदा हुए उतार-चढ़ाव और नीरव मोदी के 13700 करोड़ रुपए के घोटाले के चलते भले ही भारत में अस्थाई रूप से हीरों की खपत घटी हो, लेकिन इसकी मध्यम से दीर्घावधि विकास दर मजबूत बनी हुई है। यह बात डी बीयर्स समूह के कार्यकारी उपाध्यक्ष और फारइवरमार्क के मुख्य कार्यकारी (सीईओ) स्टीफन लुसिए ने कही।

स्टीफन ने कहा कि करंसी मार्केट में उतार-चढ़ाव के चलते इंडिया सहित दूसरी जगहों पर हीरे की खपत घटी है। डॉलर के मुकाबले रुपए में कमजोरी भारत के लिए बड़ी चिंता की बात है।

नीरव मोदी स्कैंडल के चलते इस सेक्टर की नेगेटिव इमेज बनी है। भारत में हीरे की बिक्री में विकास 2018 में कुलमिलाकर पिछले साल जितना ही रहा है, लेकिन यह मंदी का अस्थाई दौर है। मध्यम से लंबी अवधि में यहां हीरे की खरीददारी बढ़ेगी। फॉरएवर मार्क के सीईओ ने कहा कि उनके डायमंड टीयर 1 से टीयर 4 शहरों को कवर करने वाले देशभर के 55 बाजारों में 250 रिटेल आउटलेट्स के जरिए बेचे जाते हैं।

डी बीयर्स की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक हीरे की वैश्विक खपत 2017 में 2.2 फीसदी बढ़कर 82 अरब डॉलर हो गई थी। 2018 में भी यही ट्रेंड बना रह सकता है, बशर्ते अमेरिका और चीन के बीच चल रहे व्यापार युद्ध और वैश्विक मुद्रा बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के कारण रिटेल मांग पर दबाव न बने। भारत में हीरे की मांग 2017 में सालाना आधार पर 2.5 फीसदी गिरी थी। स्टीफन ने कहा कि सप्लाई साइड को दुरुस्त करने के लिए डी बीयर्स उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए अगले 5-7 साल में 10 अरब डॉलर का निवेश करेगी। 2017 में डी बीयर्स ग्रुप का कच्चे हीरे का उत्पादन 3.35 करोड़ कैरेट रहा था, जिसके इस साल 3.4-3.6 करोड़ कैरेट तक पहुंच जाने का अनुमान है।