सस्ता हो सकता है पेट्रोल-डीजल


नई दिल्ली । साल २०१४ की जुलाई में दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल की कीमत थी करीब ७३ रुपए और दिसंबर होते होते ये हो गई ६१ रुपए। हो सकता है २०१५ में पेट्रोल और सस्ता हो जाए। लेकिन ऐसा क्यों हो रहा है पिछले कुछ सालों से पेट्रोल की कीमत में लगातार इजाफा हो रहा था, लेकिन अचानक ऐसा क्या हो गया कि पेट्रोल की कीमत इतनी तेजी से कम हो गई। क्या नरेंद्र मोदी के पीएम बनने से अच्छे दिन आ गए हैं नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है। कम से कम इसमें उनका कोई योगदान नहीं है। इसका जवाब अर्थशास्त्र में छिपा है। अर्थशास्त्र की भाषा में इसका जवाब आसान है- डिमांड कम, सप्लाई ज्यादा, इसलिए कीमत सस्ती। सवाल ये है कि क्या भारत में पेट्रोल की डिमांड कम होने से कीमत कम हुई है जवाब है, नहीं। भारत जैसे विकासशील देश में तो उल्टे डिमांड बढ़ रही है। भारत में पेट्रोल सस्ता होने की बड़ी वजह है अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत कम होना। भारत अपनी पेट्रोल-डीजल की जरूरत अंतर्राष्ट्रीय बाजार से कच्चा तेल खरीद कर पूरी करता है। ऐसे में जब अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत कम हुई तो भारत में भी पेट्रोल की कीमत कम हो गई। भारत में भले ही पेट्रोल की कीमत को उस अनुपात में कम नहीं किया गया जितनी गिरावट कच्चे तेल की अंतर्राष्ट्रीय कीमत में आई। २०१४ के जून महीने में अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत ११५ डॉलर प्रति बैरल थी जो साल खत्म होते-होते ५९ डॉलर प्रति बैरल हो गई। यानि लगभग आधी। कई जानकारों का मानना है कि २०१५ में कच्चे तेल की कीमत ५० डॉलर प्रति बैरल के नीचे भी जा सकती है।