भविष्य निधि में वेतन के १२ फीसदी की शर्त हटेगी!


नई दिल्ली। ज्यादा से ज्यादा लोगों को अपने दायरे में लाने और उन्हें सामाजिक सुरक्षा तंत्र से जोडऩे के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने पांच दशकों से भी ज्यादा पुराने नियमों को बदलने का सुझाव दिया है। इस प्रकार के बदलाव से निर्माण जैसे क्षेत्र से जुड़े कम आयवर्ग के कर्मचारियों के नियमितिकरण में सहायता मिलेगी।

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने सुझाव दिया है कि कर्मचारियों के वेतन का जो १२ फीसदी हिस्सा जरूरी तौर पर ईपीएफओ में आता है, उसे या तो कम कर दिया जाना चाहिए या एक तय समय तक इसे नहीं लिया जाना चाहिए। श्रम मंत्रालय को भेजे गए प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि इससे जुड़े ऐक्ट के शेडयूल-१ को हटाया जाना चाहिए ताकि १० या इससे ज्यादा कर्मचारियों वाले हर संगठन को ईपीएफओ के दायरे में लाया जा सके। अभी यह सीमा २० या इससे ज्यादा कर्मचारियों की है। इसने अपने अफसरों की जांच के अधिकारों में बदलाव, एक अपीलेट कमिटी बनाने और ईपीएफओ सब्सक्राइबर्स की शिकायतें दूर करने के लिए एक मल्टी-मेंबर ट्राइब्यूनल बनाने का प्रस्ताव भी रखा है।