अब महंगी से महंगी कारों को चुरा रहे हाईटेक चोर


– लैपटॉप से कार का सिक्योरिटी सिस्टम कर देते हैंं डी-कोड
इंदौर । पहले कार का ताला खोलने के लिए चोर नकली चाबी या मास्टर की का इस्तेमाल करते थे या कार के ताले को तोड़कर उसे चुरा कर ले जाते थे, लेकिन अब जमाना बदल गया है, इस बदलते जमाने के साथ चोर भी हाईटेक हो गए हैं। अब ये चोर बिना चाबी के ही लाखों रुपए की महंगी से महंगी इलेक्ट्रानिक कारों को पल भर में हैक कर लेते हैं और पूरा सिक्योरिटी सिस्टम डी-कोड करके कार लेकर रपूâचक्कर हो जाते हैं। आईजी ने इन चोरों का पता लगाने के लिए क्राइम ब्रांच को लगा दिया है।
पुलिस को जांच के दौरान यह जानकारी सामने आई है कि इन महंगी पजेरो और मर्सीडीज कारों को चुराने में दिल्ली, सूरत, जयपुर और आगरा के चोरों का हाथ है, जो नकली चाबी से नहीं लैपटाप से कार को चुरा रहे हैं। जांच में शामिल डीएसपी से एक युवक ने संपर्वâ किया। वह आईबी और एटीएस के लिए मुखबरी करता था। उसने बताया कि पहले स्वैâल व तार से कार का डोर लॉक खोल दिया जाता है। सेंट्रल लॉविंâग होने पर वायर काटकर साउंड सिस्टम को ऑफ कर देते हैं। लॉक खुलते ही कम्प्यूटर विशेषज्ञ कार को उसमें लगे विशेष पोर्ट द्वारा लैपटाप से जोड़ दिया जाता है। चोर इंजिन के इम्मोबलाइजर और इंंजिन वंâट्रोल मॉड्यूल (ईसीएम) पॉवर वंâट्रोल यूनिट (बीसीयू) व बॉडी वंâट्रोल मॉड्यूल (बीसीएम) को डी-एक्टिवेट कर देता है। लैपटॉप से ही स्टार्ट कमांड देकर गाड़ी चालू कर दी जाती है।
शोरूम और सर्विस स्टेशन के युवक भी शामिलः मुखबिर के अनुसार कार चुराने के लिए गिरोह का मॉस्टर माइंड महंगे कार शोरूम और सर्विस स्टेशन पर काम करने वाले युवक को शामिल कर लेता है। दरअसल सर्विसिंग के दौरान चोरों से मिले युवक कार की चाबी को स्वैâन कर लेते हैं। फिर चाइना सॉफ्टवेयर की मदद से एक और चाबी तैयार कर लेते हैं। पिछले दिनों क्राइम ब्रांच ने ऐसे ही गिरोह का पर्दाफाश किया था। दरअसल चोर की-कोडिंग करने वाली लोंस, एडी व सिल्का जैसी वंâपनियों के पायरेटेड स्वैâनर खरीद लेते हैं। एक लॉक विशेषज्ञ के मुताबिक इस सॉफ्टवेयर से चोर पल भर में डूप्लीकेट चाबी बना लेते हैं।